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शिक्षादूत प्राचार्य विमल दुबे अपने सेवानिवृत्ति अवसर पर नगरवासियों के नाम लिखा पाती |

बलरामपुर ब्यूरो (आफताब आलम ) | स्वामी आत्मानंद हिंदी मीडियम स्कूल के प्रचार्य विमल दुबे ने अपने सेवानिवृत्ति अवसर पर बलरामपुर वासियों के नाम लिखें पाती से नगरवासियों का दिल जीत लिया | आपको बता दें कि विदाई नाम का शब्द वाकई एक पीड़ादायक होता है, लंबे समय से अपने शिक्षकिय कार्य को लेकर सेवा दे रहे,बलरामपुर हाई स्कूल के प्रचार्य विमल दुबे का आज 30 नवंबर 2022 को विदाई के इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सभी से मिल पाना तो संभव नही है,जिस वजह से उन्होंने बलरामपुर वासियों को पाती देते हुए अपने सेवा काल का जिक्र किया है जिसे पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे | 25 सितंबर 1987 से आज तक के मध्य यदि नवम्बर 2007 से ऑक्टूबर 2010 तक के समय को घटा दिया जाय तो भी जो समय शेष बचा है वह लगभग 32 वर्षोँ से भी अधिक है। यह मेरे जीवन की वह अवधि है जिसे मैंने आपके बीच खोया है | तब के कितने नन्हें मुन्ने आज नगर के वरिष्ठ व सम्मानित नागरिक,व्यवसायी ,ओहदेदार, जन प्रतिनिधि ,पत्रकार तथा सम्मानित वकील या डॉक्टर के रूप में प्रतिष्ठित हैं | मुझे सबका भरपूर अपनत्व, प्यार, सम्मान व सहयोग मिला जिसके लिए मैं ताउम्र कृतज्ञ रहूँगा | 30 नवम्बर 22 को बतौर शासकीय सेवक मेरी सेवावधि समाप्त हो रही है | इस अवसर पर आप प्रत्येक से मिल पाना मुश्किल है लेकिन प्रत्येक से आग्रह करता हूँ कि इतनी लंबी अवधि तक शासकीय दायित्वों के निर्वहन में हर किसी को किसी न किसी रूप में क्षण भर के लिए सही मानसिक ,शारीरिकअथवा आर्थिक कष्ट दिया ही होऊँगा | आप सबों से उन क्षणिक /दीर्घकालिक सन्तापों के लिए यह मेरी क्षमायाचना के शब्द मेरे निजी प्रतिनिधि बनकर करबद्ध आपके समक्ष प्रस्तुत हैं उम्मीद है आपका उदार व विशाल हृदय इन्हें निराश नही करेंगा सेवानिवृति के अंतिम पखवाड़े में मेरे जिन सहयोगियों को मेरे चलते उनके दिल में कैद तकलीफों की ज्वालामुखी प्रस्फुटित होकर समाचारों के सुर्खियों में प्रगट हुई है मैं उन्हें मेरे शिक्षकीय सेवा के दौरान नवाचारी किंतु अंशतः सफल प्रयास में सक्रिय तथा निःस्वार्थ योगदान के लिए हृदय के अंतिम छोर से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद देता हूँ क्योंकि उन्होंने संसाधनों की घोर कमी से जूझते मात्र स्कूलों की पढ़ाई पर निर्भर छात्रों को घर मे भी रेडियो (तब संचार का एकमात्र सुलभ साधन) पर अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में मेरा समर्थन तथा मेरे से एक कदम आगे चलकर तत्कालीन जिला प्रशासन को हमारे पक्के इरादे पर भरोसा दिलाने में मेरे हमकदम की भूमिका निभाई थी |यद्यपि व्यक्तिगत ,पारिवारिक,सामाजिक इत्यादि आवश्यकताओं की पूर्ति वश वो शनै: शनै: हमसे पृथक हुए किंतु एक मजबूत स्तंभ स्थापित करने के बाद ! कालांतर में कार्य की प्रगति और उनकी रुचि का सम्मान करते हुए जिला प्रशासन ने आर्थिक सहयोग से रेडियो की स्थापना भारत सरकार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी अनुज्ञप्ति के आधार पर करा दी किंतु औपचारिकता तथा प्रक्रिया में काफी समय लगा और 2018 के अप्रैल महीने में सपने का स्वरूप आकार ले सका | अब आपके इस अपनी संस्था को संचालित करने के लिए साहित्य,संस्कृति,संगीत,धुन,सृजन, सोच,सुविचार ,संचेतना में रुचि रखनेवाले समाज के सदस्यों को आगे आकर निःस्वार्थ भाव से जुड़ने की आवश्यकता है क्योंकि यह मंच ऐसे ही चिंतकों के लिए निर्मित व स्थापित है जो अपने सुविचारों के लब्जों को इस मंच के अभाव में व्यर्थ ही अपव्य्यित कर देते हैं | मेरी 20 वर्ष की लगातार सेवा पश्चात मुझे प्राप्त पद्दोन्नति ने 3 वर्षों तक आपसे दूर रखा था किंतु पुनः जिन प्रभावों ने मुझे इस शैक्षणिक केंद्र के लिए उपयुक्त समझकर मुझे यहाँ प्रतिस्थापित किया था मैं उनका भी शुक्रगुजार हूँ किंतु उनका वह प्रयास कितना सार्थक था ,आंकलन स्वयं ही करेंगे | मेरे सुख-दुखों में हरपल साथ व्यतीत पलों के मेरे अंतरंग सहभागी बड़े , छोटे तथा हमउम्र साथियों को भीआज मैं हृदय से स्मरण कर उनका आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने बोझिल पलों को भी अपने तरीके से सहज बना दिया ! आप सबकी शुभेच्छा और शिक्षा के प्रति संवेदनशील शासन तथा जिला प्रशासन के सक्रिय निर्देशन में जिला मुख्यालय स्थित शिक्षा का मुख्य केंद्र आपका अपना शासकीय हाई स्कूल अब स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट स्कूल के रूप में विकसित हो चुका है जो सर्व सुविधाओं तथा विषय एक्सपर्ट शिक्षकों से परिपूर्ण शैक्षणिक सेवा के लिए तैयार है |आप प्रत्येक द्वारा प्रदत्त अपार प्रेम- व्यवहार ही मेरा अमूल्य उपहार है जिसे साथ लेकर मै आपसे पृथक हो रहा हूँ | आपकी और मेरी शुभेच्छाएँ परस्पर हमारा साथ निभाएँगी, इसी कामना के साथ यथोचित अभिवादन |

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