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Cyber Crime Alert: डेटा चोरी और डिजिटल अरेस्ट पर SC सख्त

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Cyber Crime Alert:  नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के नागरिकों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा और विदेशी सर्वरों पर कथित रूप से संग्रहीत भारतीयों के चोरी हुए व्यक्तिगत डाटा को वापस पाने या नष्ट करने के मामले में एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर गंभीरता से विचार करे।

साइबर सुरक्षा सलाहकार नीतीश कुमार द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि विदेश में संग्रहीत भारतीयों के डाटा को सुरक्षित करने के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने याचिका को एक ‘पूरक प्रतिवेदन’ के रूप में मंत्रालय के पास भेजते हुए उचित कदम उठाने को कहा है।

विदेशी सर्वरों पर भारतीयों का डाटा और डिजिटल अरेस्ट का खतरा सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कम से कम पांच देशों में मौजूद संस्थाओं द्वारा भारतीयों का डाटा चुराया गया है, जिसका इस्तेमाल अब नागरिकों के खिलाफ एक हथियार के रूप में किया जा रहा है।

फिंगरप्रिंट और व्यक्तिगत पहचान जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियों का दुरुपयोग कर ‘डिजिटल अरेस्ट’ और जबरन वसूली जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। कोर्ट ने इस चिंता की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि न हो, आरोपितों को भारत लाना मुश्किल है।

इस पर याचिकाकर्ता का कहना था, ‘यदि हम डाटा वापस नहीं ला सकते, तो कम से कम हम इसे पुनर्गठित और सुरक्षित तो कर ही सकते हैं।’ तकनीकी मामला और डीपीडीपी एक्ट को लागू करने की मांग कोर्ट ने माना कि यह मामला पूरी तरह कानूनी न होकर ‘अत्यधिक तकनीकी’ है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप के बजाय प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है।

इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार के पास जाने की सलाह दी। याचिका में केंद्र सरकार को डाटा रिकवर या नष्ट करने के निर्देश देने के साथ-साथ ‘डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट, 2023’ को तुरंत पूरी तरह लागू करने की मांग की गई है।

साथ ही, डाटा चोरी की जांच की निगरानी के लिए एक विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का भी अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका का निपटारा करते हुए मंत्रालय को भविष्य में डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस पर विचार करने की छूट दी है।

 

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