प्रांतीय वॉच

दो साल बाद उल्लास और उत्साह के साथ लौटी रौनक…झांकी के प्रसंगों ने मोहा मन

डोंगरगढ़। कोरोनाकाल के चलते लगातार दो वर्षों तक गणेश विसर्जन झांकियां नहीं निकली। तीसरे वर्ष दोगुने उल्लास व उत्साह के साथ आकर्षक लाइटों व मनमोहक प्रसंगों ने रात भर लोगों को बांधे रखा। मूवमेंट झांकियों ने प्रथम तीन में जगह बनाई। छुटपूट घटनाओं के बीच शनिवार की रात विसर्जन झांकी निकली। इसके पहले रात में अचानक हुई बारिश ने उत्साह फीका कर दिया था लेकिन कुछ ही देर में बारिश बंद हुई और झांकियां प्रदर्शन के लिए निर्धारित रूट में निकली। पहले पुरस्कार मंच रेलवे चौक में एकता मंच द्वारा सभी 9 झांकियों का अवलोकन किया गया। झांकियों में अलग-अलग प्रसंगों ने पुरस्कार मंचो के सामने प्रस्तुति दी। इधर गोविंदोत्सव की शांति पूर्वक सफलता के चलते पुलिस इस बार भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उत्साहित थी। चौक-चौराहों व प्रत्येक झांकी में जवान तैनात रहने के बाद भी चाकूबाजो ने माहौल खराब करने का काम किया। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के चलते कोई बड़ी घटना नहीं हुई। झांकी में अपने अलग तरह के प्रसंगों के लिए मशहूर गरीबी रेखा गणेश उत्सव समिति ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर आधारित झांकी प्रस्तुत किया। कई मंचों में गरीबी रेखा की झांकी को स्थान मिला। राज्य की संस्कृति से रूबरू होने का मौका लोगों को मिला। पारम्परिक गीतों के बीच झूमने के लिए लोग मजबूर हो गए। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष नवाज खान भी राउत नाचा करते दिखे। पुरस्कार मंचो के सामने से गुजरी झांकियां, मूवमेंट वाली सराही गई- झांकियों को पुरस्कृत करने के लिए जगह-जगह पर निर्णायक मंच तैयार भी किया गया था। मंच के सामने झांकियों ने प्रसंगों की प्रस्तुति दी। पुरस्कार मंचो में एकता मंच रेलवे चौक, भाजपा मंच, सिद्धिविनायक मंच, श्रीहनुमान भक्त युवा समिति, कांग्रेस कमेटी व मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा झांकी समितियों को पुरस्कृत किया गया। लोगों की सेवा के लिए रात भर बंटा चाय-पोहा- झांकी देखने के लिए शहर ही नहीं बल्कि गांवों से भी बड़ी संख्या में भीड़ रात भर टिकी रहती है। लोगों की रात भर सेवा भी कई समितियों ने की। बाल मंदिर के सामने रात भर निःशुल्क पोहा वितरण किया गया। साथ ही गुरुद्वारा के सामने मारुति नंदन समिति ने चाय व जलपान का वितरण किया। महावीर तालाब में के कुंड में ही विसर्जन की अनुमति- शहर के सभी मूर्तियों के विसर्जन के लिए महावीर तालाब के कुंड में ही विसर्जित किया गया। पूरे तालाब में मूर्तियां विसर्जित न हो और सुरक्षा दृष्टिकोण से इसके लिए नगर पालिका द्वारा बेरिकेड्स लगाएं गए थे। यहां पर गोताखोर, नगर पालिका के कर्मचारी भी तैनात रहे। इसलिए सभी छोटी-बड़ी मूर्तियों का विसर्जन कुंड में ही किया गया। सुरक्षा व प्रशासनिक व्यवस्था में एसडीएम गिरीश रामटेके, तहसीलदार राजू पटेल, एसडीओपी केके पटेल, टीआई सुरेंद्र स्वर्णकार सहित डोंगरगढ़ डिविजन के आला-अफसर व जवान तैनात रहे।

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