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छत्तीसगढ़: अपात्र को बना दिया उप अभियंता,पात्र को बताया अपात्र

रायपुर । पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में दस साल पहले हुए उप अभियंता सिविल के पद पर भर्ती में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। अपात्र को उप अभियंता बनाने और पात्र को अपात्र बनाने को लेकर पीड़ित ने कोर्ट में परिवाद दायर किया था। कोर्ट ने सिविल लाइन थाना पुलिस को अपराध कायम करने के साथ जांच के आदेश दिए है। मामले में शनिवार को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ फर्जी दस्तावेज के आधार पर भर्ती कर धोखाधड़ी करने का अपराध कायम कर लिया है।

कुल विज्ञापित पद 275 से अधिक 383 व्यक्तियों को नियुक्ति दी गई

सिविल लाइन सीएसपी विरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2011-12 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप अभियंता (सिविल) के 275 पदों की भर्ती के लिए व्यापमं ने 23 मार्च 2011 तक आवेदन आमंत्रित किया था। कोरबा निवासी पीड़ित भारतेंदु कुमार कमल का आरोप है कि भर्ती में वृहद पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और अयोग्य व अपात्र व्यक्तियों को नियम विरुद्ध नियुक्ति दी गई। भर्ती प्रक्रिया में ऐसे व्यक्तियों को नियुक्ति दी गई है, जिनकी शैक्षणिक अर्हता आवेदन प्रस्तुति की अंतिम तिथि तक पूरी नहीं हुई थी

यही नहीं, ऐसे लोगों की भी नियुक्ति हुई है, जिनका नाम न तो प्रमाण-पत्र सत्यापन के लिए बुलाए गए अभ्यर्थियों की सूची में है और न ही नियुक्ति आदेश में है। आरक्षण रोस्टर को भी ताक में रखते हुए नियुक्ति दी गई है। कुल विज्ञापित पद 275 से अधिक 383 व्यक्तियों को नियुक्ति दी गई, जो प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। भारतेंदु कुमार कमल के अनुसार इस अनियमितता की शिकायत मय दस्तावेज एसपी और पुलिस थाने में करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब न्याय पाने के लिए कोर्ट में परिवाद दायर करना पड़ा।

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