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आरबीआई ने पॉलिसी दरों में नहीं किया कोई बदलाव, रेपो रेट 4 फीसदी पर बरकरार

नई दिल्ली.  दुनिया भर में ओमीक्रोन का खतरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में RBI ने आज पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. पॉलिसी रेट पहले की तरह 4% पर बरकरार है. हालांकि मौजूदा हालात में मार्केट एक्सपर्ट्स को पहले से उम्मीद थी कि RBI गवर्नर शक्तिकांत दास पिछली बार की तरह इस बार भी पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं करेंगे. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को 4% पर बरकरार रखते हुए इकोनॉमिक के लिए अकोमडेटिव नजरिया बरकरार रखा है.इसके अलावा RBI ने रिवर्स रेपो रेट भी पहले के लेवल पर यानी 3.35% पर रखा है. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के 6 सदस्यों में से 5 से पॉलिसी रेट को मौजूदा लेवल पर बनाए रखने का समर्थन किया था. शक्तिकांत दास ने बताया कि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी भी पहले की तरह 4.25% है. आरबीआई ने 2021-22 में सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमान 5.3% पर बरकरार रखा.

कोविड से निपटने के लिए तैयार

शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक स्पिलओवर को प्रबंधित करने के लिए हमारे पास मजबूत बफर है और मुद्रास्फीति मोटे तौर पर लक्ष्य के साथ संरेखित है. हम COIVD-19 से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं.

तीन दिनों से चल रही बैठक का आज फैसला

बता दें कि पिछले दो दिनों से चल रही इस साल 2021 की आखिरी द्विमासिक एमपीसी बैठक आज समाप्त हुई है. 6 दिसंबर से शुरू हुई इस बैठक की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास कर रहे हैं और अनुमान लगाया गया था कि लगातार नवीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा. अधिकतर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कोरोना वायरस के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को देखते हुए रेपो रेट को 4 फीसदी पर स्थिर रखा जा सकता है.

2001 अप्रैल के बाद रेपो-रिवर्स रेपो सबसे कम

रिजर्व बैंक की 8 दिसंबर को मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की 3 दिनों की बैठक खत्म हुई। रेपो रेट 4% पर और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार है। रेपो रेट का यह लेवल 2001 अप्रैल के बाद सबसे निचला लेवल है। रिजर्व बैंक के फैसले के बाद ज्यादातर बैंक अभी निकट समय में ब्याज की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करेंगे।

होम लोन में ब्याज दर काफी जरूरी फैक्टर

होम लोन जिन लोगों ने ले रखा है, उनके लिए ब्याज दर काफी जरूरी फैक्टर होता है। यही फैसला करता है कि कितना आप लोन का पेमेंट किस्त के रूप में कर सकते हैं। होम लोन सबसे लंबे समय का लोन होता है। कर्ज लेने वाले ज्यादातर लोग ब्याज दरों में कमी चाहते हैं।

नए लोन वालों को ज्यादा समय मिलता है

जो नए लोन लेने वाले लोग हैं उनको ज्यादा समय मिलता है। ज्यादातर होम लोन फ्लोटिंग रेट पर दिया जाता है। रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2019 से फ्लोटिंग रेट को अनिवार्य किया है। बैंक इसे अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क जैसे रेपो रेट से जोड़ देते हैं। यानी इसका मतलब यह हुआ कि जब भी रेपो रेट घटेगा या बढ़ेगा, आपका ब्याज उसी आधार पर घटता बढ़ता रहेगा। यही फ्लोटिंग रेट है।

चूंकि होम लोन अपने 20 साल के निचले स्तर पर है, इसलिए अभी भी सस्ते लोन का आनंद आप ले सकते हैं। इस बार रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है, इसलिए जो लोग लोन लेने की योजना बना रहे हैं, वे अभी भी सस्ते ब्याज दर पर लोन ले सकते हैं।

पुराने लोन पर ज्यादा ब्याज देना होगा

जिन लोगों ने पहले ही होम लोन ले रखा है, उनके लिए आज के रिजर्व बैंक के फैसले का मतलब है कि आपको उसी दर से ब्याज चुकाना है, जिस पर आपने लोन लिया है। हालांकि अगर आपका होम लोन 5 साल पुराना है तो आपको इसके लिए ब्याज दरों को एक बार चेक करना चाहिए।

जिस दर पर लोन लिया है, उसे चेक करें

आपको जिस दर पर होम लोन मिला है, पहले आप उसे एक बार चेक करें। यानी पांच साल पहले आप कितनी किस्त दे रहे थे और अभी कितनी दे रहे हैं। अगर आपका होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक नहीं है तो आप इसे लिंक करा सकते हैं। हो सकता है कि आप इसकी वजह से ज्यादा ब्याज दे रहे हों। आप बैंक से चेक करें और अगर ऐसा है तो आपको तुरंत इसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक करना चाहिए या फिर दूसरे बैंक में लोन को शिफ्ट करना चाहिए।

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