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सूर्यदेव, प्रकृति, जल और वायु को समर्पित है छठ का महापर्व

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  • निर्जला व्रत रखकर कोण्डागांव के तालाब में छठ व्रतधारियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्ध्य

दिलीप सिंह/कोण्डागांव : सूर्यदेव व छठी माता की उपासना का महापर्व छठ पर व्रतधारियों ने निर्जला उपवास रखकर बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए दोपहर बाद से ही पूर्व निर्धारित तालाब में पहुंचकर पानी में खड़े रहे और सूर्यास्त के साथ दिया । स्थानीय बंधा तालाब व पलारी तालाब, नहरपारा तालाब में नगर पालिका ने पहले ही व्रतधारियों की सुविधा के लिए व्यवस्था बना रखा था । वही भोजपुरी संगम समाज से जुड़े लोगों के द्वारा बंधा तलाब घाट परिसर में आकर्षक विद्युत सज्जा, जगराता, कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए अन्य व्यवस्था किया गया । ज्ञात हो कि उत्तर भारतीयों के द्वारा इस पर्व को बड़े ही विधि विधान के साथ मनाया जाता है । चार दिनों तक चलने वाले इस महाव्रत के लिए पहले से ही तैयारी आदि करनी होती है । वही आठ नवम्बर से नहाए खाए के साथ इस पर्व को शुरुआत हुई है और उदयगामी सूर्य को पूजा अर्चना के बाद अर्ध्य देते हुए 10 नवम्बर को पर्व का समापन होगा । एक कथा के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गए थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की थी । तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था । इसके बाद अदिति के पुत्र हुए त्रिदेव रूप आदित्य भगवान, जिन्होंने असुरों पर देवताओं को विजय दिलायी । कहा जाता है कि उसी समय से देव सेना षष्ठी देवी के नाम पर इस धाम का नाम देव हो गया और छठ पूजा का चलन भी शुरू हो गया ।

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