रायपुर वॉच

अभी नहीं मिलने वाली है रायपुर में सिटी बसों की सुविधा, बस आपरेटरों ने रखीं किराया बढ़ाने की मांग

  • दो साल में खराब हो गई हैं कई बसें, नगर निगम ने शासन को भेजा किराया बढ़ाने का प्रस्‍ताव

रायपुर : ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे हैं कि निकट भविष्य में राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में सिटी बसें चल पाएंगी। दो साल से बंद सिटी बसों को चलाने की मांग ंंइ बढ़ गई है, लेकिन कई खामियों के कारण यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। सिटी बस आपरेटर का कहना है कि मांग पूरी होने के बाद ही सिटी बस का परिचालन संभव है। यदि मांगें पूरी नहीं हुई तो सिटी बसों के पहिए नहीं हिलेंगे। शासन जब तक टैक्स, किराया वृद्धि, नगर निगम की रायल्टी, बीमा और बैटरी लगाने के लिए 50 प्रतिशत खर्च वहन नहीं करेगा, तब तक सिटी बस का परिचालन नहीं हो पाएगा। निगम के अधिकारियों ने 53 प्रतिशत किराया वृद्धि को लेकर शासन को पत्र भेजा है।

दो साल से सिटी बसें खड़ी हैं, इसलिए इनके टायर, बैटरी आदि खराब हो गए हैं तथा बीमा-परमिट खत्म हो गया है। सिटी बसें पूरी तरह से कबाड़ हो चुकी हैं। ज्ञात हो कि राजधानी में रायपुर नगर निगम के अंतर्गत 170 सिटी बसों का परिचालन किया जा रहा है। नगर निगम ने सिटी बस चलाने के लिए दो प्राइवेट कंपनियों को जिम्मा सौंपा है। आमानाका डिपो से मंत्रालय के लिए कुछ बसों का परिचालन किया जा रहा है। बाकी के बसों का परिचालन कोरोना संक्रमण के दौरान 22 मार्च, 2020 से बंद हैं।

प्रत्येक सिटी बस में 10 हजार की बैटरी, 70 हजार के बीमा, फिटनेस 10 हजार, पांच हजार परमिट और आयल बदलने पर 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। उसके बाद ही सिटी बसें दोबारा सड़क पर उतर पाएंगी। सिटी बसों का परिचालन बंद होने से राजधानी वासी हलाकान हो रहे हैं। निगम के अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। निगम के अधिकारी खानापूर्ति के नाम पर बस किराया वृद्धि को लेकर शासन को पत्र लिखकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

छह साल में बसें हो गईं कबाड़
बसों को शहर में परिचालन के लिए 10 साल का परमिट है, लेकिन छह साल में ही सिटी बसों की हालत खस्ता हो गई है। जानकारों की मानें तो सिटी बसों की कीमत वर्तमान में 28 से 30 लाख रुपये है, लेकिन छह वर्षों में ही बसों की कीमत 75 फीसद से कम हो गई है। ज्यादातर बसों के पहिए, सीट आदि सब खराब हो चुके हैं। सिटी बस के संचालक का कहना है कि गाड़ियां खड़ी होने पर खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 मार्च में सिटी बस के परिचालन को लेकर नगर निगम से 70 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्री भाड़ा लेने सरकार से अनुबंध हुआ था। वर्तमान में डीजल की कीमत 98 रुपये हो गई है, इसलिए इतने कम किराया में बसों का संचालन संभव नहीं है। शासन यदि हमारी मांग पूरी करता है तो बसों का संचालन दोबारा शुरू हो पाएगा।

5,500 रुपये महीने में था सिटी
निगम ने वर्ष 2020 मार्च माह में 28 से 30 लाख रुपये में सिटी बसें खरीदी थीं। सिटी बस आपरेटर निगम को एक माह में एक सिटी बस का 5,500 रुपये अदा करता रहा है। यदि हम एक दिन की बात करें तो बस आपरेटर 184 रुपये निगम को देता है, जबकि हम यदि एक आटो किराये पर लेते हैं तो आटो मालिक को एक दिन में कम से कम तीन सौ से चार सौ रुपये अदा करना पड़ता है। उसके बाद भी सिटी बस आपरेटर द्वारा किराया वृद्धि और 50 प्रतिशत मरम्मत की मांग की जा रही है।

सिटी बस का परमिट, फिटनेस, टैक्स, बीमा सब खत्म हो चुका है। शासन किराया वृद्धि के साथ ही यदि टैक्स माफ, किराया वृद्धि और निगम की रायल्टी माफ करने के बाद बसों के टायर, बैटरी, बीमा आदि लगाने के लिए शासन 50 प्रतिशत की मदद करता है तो ही बसों का संचालन संभव है।

-सैय्यद अनवर, सिटी बस संचालक

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