तिलकराम मंडावी/डोंगरगढ़ : षहर में अलग-अलग स्थानों पर बनें मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया सालों से दफतर में लंबित है। आवंटन को लेकर लेटलतीफी की कोई ठोस वजह भी नहीं है। क्योंकि आवंटन को लेकर बनाई गई कमेटी ने प्रक्रिया को आगें बढ़ानें के लिए काम ही नहीं किया। जबकि पूर्ववर्ती निर्दलीय षहर सरकार ने पीआईसी व परिशद् की बैठकों में इन दुकानों के आवंटन को आगें बढ़़ानें के लिए कई बार प्रस्ताव पारित भी कर लिया था। लेकिन प्रस्ताव भी कागजों में ही दबकर रह गया है। नगर पालिका में नई सरकार गठन के डेढ़ वर्शों बाद भी आवंटन प्रक्रिया आगें ही नहीं बढ़ सकी है। आवंटन में लेटलतीफी को लेकर केवल अफसर ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार है, जिन्होंने दुकानों को बांटनें के लिए अब तक रूचि ही नहीं दिखाया। आवंटन से नगर पालिका की आय में इजाफा तो होता ही साथ ही यातायात की समस्याओं से भी राहत मिल सकता है। क्योंकि पुराना बस स्टैंड में बनी दुकानों के आवंटन से अस्थाई संचालित हो रही दुकानें काॅम्प्लेक्स में षिफट हो जाएगी और सड़क काफी चैड़ी होगी। इससें टैªफिक समस्या व पार्किंग को लेकर काफी हद तक राहत मिलेगी। इन दुकानों का निर्माण करीब 4 साल पहलें कराया गया था। आवंटन नहीं होनें व देखरेख के अभाव में नई दुकानें बिना उपयोग के ही कंडम होनें लगी है। जबकि नगर पालिका ने इनकम बढ़ानें के लिए लांग टर्म प्रोजेक्ट में स्वावलंबन योजना की दुकानों को षामिल किया था। परंतु योजना बनी लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक क्रियान्वयन नहीं हो सका है।
इन जगहों पर बनी दुकानों का आवंटन अटकाः मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत सतबहिनी मंदिर मार्ग, पुराना बस स्टैंड, करबला चैक व रेलवे चैक में दुकानों का निर्माण किया गया है। सभी जगहों के आवंटन की प्रक्रिया एक समान है। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के प्राथमिकता के आधार पर आवंटन किया जाना है। वहीं पुराना बस स्टैंड में वर्तमान में व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को प्राथमिकता देनी है। कई बार षहर के बेरोजगारों से फाॅर्म मंगाएं गए लेकिन आवंटन की प्रक्रिया को आगें ही नहीं बढ़ा सकें। लेटलतीफी के चलतें अब बेरोजगारों ने भी उम्मीद छोड़ दी है।
पालिका की आय में भी होता इजाफाः दुकानों के आवंटन से नगर पालिका के आय में भी सीधे तौर पर इजाफा होता। लेकिन पालिका ने इनकम बढ़ानें वालें स्त्रोतों पर काम ही नहीं किया। जबकि कोरोनाकाल में रोप-वे बंद होनें व मीना बाजार नहीं होनें से लाखों रूपए का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा टैक्स वसूली भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। आवंटन होनें से पालिका के आय में इजाफा होगा। लेकिन इस पर न तो अफसर काम कर रहे है और ही जनप्रतिनिधि भी प्रक्रिया को आगें बढ़ा रहे है। लिहाजा देखरेख के अभाव में दुकानें खंडहर होनें लगी है।
अब ये तो गलत है न, आवंटन में दलगत राजनीति नहीं होनी चाहिए : दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के कार्यकाल से अटकी हुई है। प्रदेष में जब बीजेपी की सरकार थी तो अपनें कार्यकर्ताओं को दुकानें आवंटन करानें के लिए षहर सरकार पर कई बार दबाव आया। इसी के चलतें भी आवंटन हर बार टलती रही। वहीं कांग्रेस की सरकार आनें के बाद अब कांग्रेसियों को दुकान देनें के लिए नेता एप्रोच लगा रहे है। हालांकि वर्तमान षहर सरकार ने आवंटन को लेकर अब तक इस दिषा में बिलकुल भी पहल नहीं की है। सीधे तौर पर ये कहें कि दलगत राजनीति के चलतें भी आवंटन फाइलों तक ही सिमटकर रह गई है। जबकि दुकानों के आवंटन में दलगत राजनीति करना गलत है। इससें बेरोजगारों को सीधें तौर पर नुकसान है।
एक वजह यह भी कि प्रभावितों को प्राथमिकता पहलें : सतबहिनी मंदिर मार्ग में बनी दुकानों के आवंटन में लेटलतीफी की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि पूर्व में यहां व्यापार करनें वालें अतिक्रमण प्रभावित हुए थे। इन्हें भुरवाटोला में आवास तो मुहैया करा दिया गया है। लेकिन दुकानों के आवंटन में भी प्रभावितों को सबसें पहलें प्राथमिकता देना होगा। परंतु इन दुकानों का आवंटन प्रभावित नहीं चाह रहे है। वे इसे व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं मान रहे। जबकि कई लोगों ने तो कबीर मंदिर के नीचे फिर से कब्जा कर व्यवसाय षुरू कर लिया है। नगर पालिका को आवंटन की दिषा में फिर से काम करनें की जरूरत है।
जानिए, आवंटन को लेकर वर्तमान व पूर्व अध्यक्ष का क्या है कहना
आवंटन के लिए हम प्रयासरत हैः अध्यक्ष- नगर पालिका अध्यक्ष सुदेष मेश्राम ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत बनी दुकानों के आवंटन के लिए कमेटी बनी हुई है। हमारी टीम भी आवंटन के लिए प्रयासरत है। निष्चित रूप से आवंटन से नगर पालिका की आय में वृद्धि होगी। बहुत जल्द आवंटन को प्राथमिकता वालें कार्यों में षामिल किया जाएगा।
राजनीतिक वजहों से प्रक्रिया अटकीः पूर्व अध्यक्ष- पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष तरूण हथेल ने बताया कि मेरे कार्यकाल में दुकानों के आवंटन के लिए प्रस्ताव पारित कर लिया गया था। कई बार प्रक्रिया षुरू भी की गई। लेकिन राजनीतिक वजहों से हर बार निरस्त कर दिया गया। जबकि नगर पालिका की आय को बढ़ानें के लिए प्राथमिकता के साथ आवंटन को महत्व देना चाहिए था। अभी भी देखरेख के अभाव में अब दुकानें खंडहर होनें लगी है।

