पांडुका/नवापारा/राजिम/रायपुर : शिक्षक शब्द अपने आप में अगर देखा जाए ज्ञान के अलावा अन्य विधाओं में जिसमें भावी पीढ़ी के साथ पूरे मानव समुदाय का हित समाहित रहता है ऐसा गुरु अर्थात शिक्षक का व्यक्तित्व रहता है जो पौराणिक काल से लेकर वर्तमान समय में भी पूर्णतया सार्थक है। गुरु शब्द ही पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक है और इसका अर्थ बहुत व्यापक है इसके सर्वोत्तम उदाहरण 2 राष्ट्रपति पहले वाले शिक्षक थे डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन दूसरे साइंटिस्ट थे लेकिन टीचर की भूमिका कुछ ज्यादा पसंद करते थे वह महान शख्सियत डॉ एपीजे अब्दुल कलाम थे जो अपने अंतिम समय में भी ज्ञान का प्रकाश बांटने के दौरान गोलोक वासी हो गये। यह तो बड़ी शख्सियत साधारण से असाधारण बने लेकिन हमारे बीच के शिक्षक गण आज 1 वर्ष से ऊपर हो गया शैक्षणिक संस्थान बंद हुए लेकिन कर्तव्य पथ में डटे हुए हैं चाहे छात्रों को सूखा राशन घर घर बांटना हो, मोहल्ला क्लास लगाना हो, अभी वर्तमान में जिस मुस्तैदी से कोरौना के भयंकर दूसरी लहर में मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं वह अद्भुत है इनकी ड्यूटी कोविड टीकाकरण से लेकर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में आने जाने वाले मजदूरों का बायोडाटा तैयार करना और शिक्षक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इनकी ड्यूटी कोविड-19 से खत्म हुए लोगों के सही सुपुर्दगी के लिए मरचुरी में और डेड बॉडी कोविड-19 आरक्षित श्मशान पहुंचाने तक लगी है, इसका कारण है सरकार भी जानती है शिक्षक अपनी हर जिम्मेदारी बहुत मुस्तैदी से निभाते हैं शिक्षक सूत्रों ने बताया दूसरे विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगी थी तो उन्होंने लापरवाही से डेड बॉडी ही बदल दी महिला की जगह पुरुष और पुरुष की जगह महिला डेड बॉडी दे दी । इतना करने के बावजूद कोरोनावारीयर का दर्जा देने की इनकी बेहद जायज मांग सरकार नहीं सुन रही है। दूसरी बात इन्हें ना तो पीपी किट उपलब्ध कराई जाती है और इनका वैक्सीनेशन 40 वर्ष से ऊपर शिक्षकों का हुआ है नीचे वालों का फिलहाल नहीं हुआ है इनकी भी ड्यूटी लगी हुई है और दिव्यांग शिक्षक की भी ड्यूटी लगी हुई है यह बातें दुर्ग जिले से संबंधित हैं लेकिन शिक्षकों के बारे में पूरे प्रदेश में कमोबेश यही स्थिति है, बात दुर्ग जिले की हो रही है तो सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है यहां 125 शिक्षक कोरोना टीम में काम करते-करते अपने प्राणों से हाथ धो बैठे हैं लेकिन अभी तक इनके आश्रितों को कोई विशेष सहायता या अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है इतना होने के बावजूद एक बेहद प्रशंसनीय और उत्कृष्ट कार्य पाटन ब्लॉक के 1700 शिक्षक करने जा रहे हैं इस बारे में परसदा कुम्हारी के प्रधान पाठक नरेश यादव ने छत्तीसगढ़ वाच ब्यूरो प्रमुख महेंद्र सिंह ठाकुर को जानकारी देते हुए बताया कि पाटन ब्लाक के सुविधा विहीन गाड़ाडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ब्लॉक के सभी शिक्षक और इसके साथ सबसे बड़ी बात वहां के रसोईया और सफाई कर्मचारी जिनको नाम मात्र का मानदेय मिलता है उनके आर्थिक सहयोग से कोविड-19 केयर सेंटर जिसमें 10 बेड और 5 नग जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर रहेगा प्रदान कर उस क्षेत्र के कोरोना पॉजिटिव लोगों के लिए कल दिनांक 6 मई को यह सुविधा प्रदान की जाएगी और इसके लिए पाटन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी टी आर जगदल्ले और पाटन ब्लॉक उपाध्यक्ष चंद्रवंशी जी का सहयोग विशेष रुप से है जिसे मुख्यमंत्री के ओएसडी आशीष वर्मा की उपस्थिति में शुरू किया जाएगा उक्त अस्पताल में डॉक्टर सहित नर्सिंग स्टाफ पर्याप्त है लेकिन सुविधा नहीं होने से वह भी बेबस होकर मरीजों को रिफर भर कर रहे थे अब यही देखभाल होगी। श्री यादव ने आगे बताया कि 4 तारीख को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 52 प्रिंसिपल, 60 संकुल समन्वयक के माध्यम से 1700 शिक्षकों तक इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए योगदान के लिए अपील की और सभी ने त्वरित गति से अपनी सहायता राशि प्रदान की, यहां यह बात खास है शिक्षकों ने भी कोरोना ड्यूटी में रहते हुए इन्हीं संसाधन की कमी से कहीं-कहीं उन्हें बहुत मुश्किल हुई प्राइवेट अस्पताल या जिला अस्पताल की ओर उन्हें देखना पड़ा इसलिए यह बात शिक्षक समुदाय के अंदर घर कर गई थी और इसे मूर्त रूप संभवत छत्तीसगढ़ सहित इंडिया में पहली बार पाटन ब्लाक के शिक्षक दे रहे हैं इनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है, इसके साथ सभी शिक्षकों ने मुख्यमंत्री सहायता कोष में बढ़-चढ़कर स्वेक्षा से योगदान भी दिया।
शिक्षक समुदाय को सैल्यूट जान पर खेलकर कोरोना ड्यूटी कर रहे हैं…..पाटन ब्लाक के शिक्षक 72 घंटे में आपसी आर्थिक सहयोग से कोविड-19 केयर सेंटर बनाने जा रहे हैं…..

