महेन्द्र सिंह/ नवापारा राजिम/रायपुर : महज 26 वर्ष की उम्र और खेत की मिट्टी में अपने पहलवान पिता रामचरण सिंह राजपूत को अपना गुरू बनाकर अभाव में प्रेक्टीश चालू की इसके पूर्व जब इनकी उम्र 20 वर्ष थी विश्व विख्यात रेसलर द ग्रेट खली की ओर जालंधर पंजाब मे आयोजित सी डब्लू ई हैवी वेट चैम्पियन शिप जीतकर तहलका मचा दिया इसके बाद 2016 मे पहली बार अंर्तराष्ट्रीय कॉन्टेक्ट के लिय इन्होनेे प्रयास किया लेकिन सफलता नही मिली और 2018 मे आर डब्लू ए के नाम से अपने गृहग्राम बांदा उ.प्र. के पलरा गांव में अकादमी खोली वहा पर पंजाब , हरियाणा , राजस्थान , उत्तर प्रदेश , झारखण्ड , मध्य प्रदेश नेपाल , उत्तराखण्ड के 13 लोगो को वर्ल्ड रेसलिंग इन्टरटेंन्टमेंट अर्थात डब्लू डब्लू ई के लिये कड़ी ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी।क्योकि वर्ल्ड रेसलिंग कॉम्पीटीशन काफी जादा दमखम और चपलता का खेल रहता है इसमें कई रेसलर जिंदगी भर अपंग और मृत्यु का भी शिकार हो चुके है इसलिये दमखम और बहादूरी की आवश्यकता होती है। इसलिये इसमें गिनेचुने लोग ही सफल हो पाते है। मेहनत रंग लाई और वर्ष 2019 में इनका चयन अमेरिका में वर्ल्ड लेबल रेसलिंग कैम्पस के लिये इनका चुनाव हुआ और ग्रेट खली के बाद इन्होने उस स्तर पर भारत नाम रोशन किया- जब भारत गणतंत्र दिवस मना रहा था तो 26 जनरवरी के दिन विश्व के न.2 रेसलर से इनका मुकाबला हुआ 26 साल का यह युवा रेसलर लक्ष्मीकांत सिंह राजपूत का मुकाबला विश्व के न.2 रेसलर फिन बेलोर से जमकर अमेरिका के फलोरिडाके विश्व प्रसिद्ध इन्डोर स्टेडियम में केरोना काल के कारण बिना दर्शको के जमकर मुकाबला हुआ जिसमें लक्ष्मीकांत सिंह राजपूत मामूली अंतर से हारे लेकिन फिन बेलोर लोहा मान गया और लक्ष्मीकांत राजपूत से हाथ मिलाकर बधाई दी और कहा अगला विश्व चैम्पियन इंडिया से आपके रूप में आ चुका है जबकि इस तरह के मुकाबले मे रेसलर हाथ मिलाना तों दूर एक दुसरे को देखना भी पंसद नही करते लाखो डॉलर की इस प्र्रतियोगिता में गुरूराज ने एक ही बार में इतनी छोटी उम्र में बेहद तगड़ी इनामी राशि उप विजेता के रूप मंे हासिल की।
पूरे भारत के साथ छत्तीसगढ़ में विश्व लेबल का रेसलर तैयार करने की योजना है- लक्ष्मीकांत सिंह राजपूत गुरूराज के पिता रामचरण सिंह राजपूत से छ.ग. वॉच ब्युरो प्रमुख महेन्द्र सिंह ठाकुर से पूर्व का परिचय है और यह संवददाता बहुमुखी प्रतिभा के धनी विश्व स्तरीय रेसलर गुरूराज एव इनके बड़े भाई लाखन सिंह राजपूत त्वाईकांडो और मार्सल आर्ट में बचपन से महारत हासील किये जिसमें गुरूराज कक्षा 10वी मंे मार्सल आर्ट और त्वाइकान्डो में ब्लैक बेल्ट रहे इसी तरह स्कूली जीवन मे संभाग स्तर पर तीन बार भाला फेंक में चैम्पियन रहें ऐतिहासिक उपल्ब्धि हासील करने के बाद एक सप्ताह पूर्व विश्व स्तरीय रेसलर लक्ष्मीकांत राजपूत से विडियो कॉल के माध्यम से बातचीत हुई उनको छत्तीसगढ वासीयो की ओर से महेंन्द्र सिंह ठाकुर ने जब बधाई दी तो भावुक होकर लक्ष्मीकांत सिंह राजपूत ने कहा पूरे भारत सहित छ.ग. में भविष्य में उनकी इच्छा है विश्व स्तरीय रेसलर तैयार करने हेतू पूरे संसाधन जुटा कर अकादमी खोलना है और पूरे विश्व में भारत का परचम लहराना है। मैं तो अपने पुज्य पिता और गुरू रामचरण सिंह के साथ खेत की मिट्टी स्वयं अपने हाथ से खोदकर अथक प्रयास कर आज इस मुकाम तक पहुच चुका हू भगवान की दया से अब कोई कमी नही है यह सब देेश का नाम रोशन करने के लिये समर्पित करूंगा गुरूराज सिह छ.ग वॉच ब्यूरो प्रमुुख महेन्द्र सिंह ठाकुर सें बातचीत करते हुये कहा सोनी स्पोर्टस चैनल से बातचीत चल रही इसमे पूरे वर्ल्ड में हमारे मुकाबले का प्रसारण होने की बातचीत चल रही है यहा यह बताना जरूरी है क्रिकेट के बाद फ्री स्टाइल रेसलिंग का यह खेल पूरे विश्व में सबसे जादा लोकप्रिय है।
पिता और लक्ष्मीकांत सिंह के गुरू लाखन सिंह राजपूत का बुन्देलखण्डी भाषा मे भावुक कर देने वाला जवाब- छ.ग. वॉच ब्युरो प्रमुख महेन्द्र सिंह ठाकुर ने जब इनके पिता रामचरण सिंह राजपूत से उनके बच्चे का की सफलता के बारे में बांदा के प्रसिद्ध समाजसेवी और उद्योगपति ब्रजेश सिंह लाला के साथ विडियो कॉल के माध्यम से पूछा तो पूर्व के प्रसिद्ध पहलवान रामचरण सिंह राजपूत खांटी देशी वेशभूषा समान्य कुर्ता और समान्य लूंगी धारण किये कहा-मैं नही जनतेव मैं लरिका से बहुत मेहनत करवा हउ अब जउ करी पूरे देश के खातिर करी। अर्थात उन्हे बच्चे पर पूरा गर्व है उसने क्या सफलता हासिल की उससे लेना देना नही है लेकिन जो भी करेगा पूरे देश के लिये करेगा।
गुरूराज उर्फ रूद्रा- खली से भी बड़े बनेगे महाबली – मिट्टी के लाल ने भारत का नाम पुरे विश्व में रोशन किया- भविष्य में छत्तीसगढ़ में भी रेसलिंग अकादमी खोलने की इच्छा जताई

