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बड़ी खबर: 12 सांसदों के निलंबन के विरोध में एकजुट विपक्ष, दूसरे दिन की कार्यवाही से पहले बुलाई बैठक, ले सकते हैं बड़ा फैसला

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नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में हंगामे और अनुशासनहीनता के आरोप में राज्यभा के 12 सासंदों को निलंबित कर दिया गया है. ये सांसद अब सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकेंगे. विपक्ष ने इस फैसले की निंदा करते हुए इस निलंबन को अलोकतांत्रिक कहा. सांसदों को निलंबित किए जाने के विरोध में पूरा विपक्ष शीतकालीन सत्र का बहिष्कार करने की तैयारी में है. आज होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में इस पर फैसला लिया जाना है. निलंबित किए गए सांसद कांग्रेस, टीएमसी, शिवसेना, सीपीएम से हैं.

इस मामले पर आगे की कार्रवाई पर चर्चा करने के लिए, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज सुबह 10 बजे विपक्षी दलों की अहम बैठक बुलाई है. संसद सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही से पहले होने वाली इस बैठक के लिए TMC को भी बुलावा भेजा गया है. राज्य सभा के साथ-साथ लोक सभा के नेता भी इस बैठक में शामिल होंगे. यह बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में होगी. सूत्रों के मुताबिक कई विपक्षी दल चाहते हैं कि सरकार से बातचीत कर निलंबन को वापस करवाया जाए, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो संसद के अंदर और बाहर प्रदर्शन किया जाएगा.

‘अशोभनीय आचरण’ के कारण हुए निलंबित
दरअसल, इस साल अगस्त में हुए राज्यसभा के मॉनसून सत्र के दौरान ‘अशोभनीय आचरण’ के लिए 12 सदस्यों को सोमवार को वर्तमान शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया, जो कि उच्च सदन के इतिहास में ऐसी सबसे बड़ी कार्रवाई है. उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा, जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी.

जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है, उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं.

2020 में निलंबित हुए थे 8 सांसद
संसदीय रिकॉर्ड की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि यह राज्यसभा से सबसे बड़ी संख्या में सदस्यों का निलंबन है. इससे पहले 2020 में आठ सांसदों को निलंबित किया गया था, जो दूसरी सबसे ज्यादा संख्या थी. इनमें डेरेक ओ ब्रायन (तृणमूल कांग्रेस), संजय सिंह (आम आदमी पार्टी), राजीव सातव (कांग्रेस), केके नागेश (माकपा), सैयद नासिर हुसैन (कांग्रेस), रिपुन बोरा (कांग्रेस), डोला सेन (तृणमूल कांग्रेस) और इलामारम करीम (माकपा) शामिल हैं.

वर्ष 2010 में राज्यसभा से सात सदस्यों को निलंबित किया गया था. वरिष्ठ नेता एवं स्वतंत्रता सैनानी राज नारायण को राज्यसभा से चार बार निलंबित किया गया था, जबकि उपसभापति रहे गोदे मुहारी को दो बार उच्च सदन से निलंबित किया गया था.

‘संसद में सवाल भी हों और शांति भी’
संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू हो गया है. सत्र शुरू होने से पहले संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘संसद में सवाल भी हों और संसद में शांति भी हो. हम चाहते हैं संसद में सरकार के खिलाफ, सरकार की नीतियों के खिलाफ, जितनी आवाज प्रखर होनी चाहिए वह हो, लेकिन संसद की गरिमा, अध्यक्ष व आसन की गरिमा.इन सब के विषय में हम वह आचरण करें, जो आने वाले दिनों में देश की युवा पीढ़ी के काम आए.’

कृषि कानून की वापसी पर दोनों सदनों की मुहर
संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा ने सोमवार को तीन विवादित कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को बिना चर्चा के मंजूरी प्रदान कर दी. इससे पहले इस निरसन विधेयक को लोकसभा में बिना चर्चा के पारित किया गया. विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा किया लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए विधेयक को पहले लोकसभा ओर फिर उसके बाद राज्यसभा में पारित कर दिया गया.

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