- ऋचा जोगी ने जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने और नियमों में किए गए संशोधन को हाई कोर्ट में दी है चुनौती
बिलासपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी बहू और जनता कांगे्रस छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष अमित जोगी पत्नी ऋचा जोगी को हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने जवाब पेश करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत दी है। बुधवार को चीफ जस्टिस एके गोस्वामी व जस्टिस गौतम भादुड़ी के डिवीजन में उनकी याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ऋचा के वकील गैर मुखोपाध्याय उपस्थित नहीं हो सके। उनकी ओर से वकील ने मुखोपाध्याय की अनुपस्थिति की जानकारी देते हुए जवाब पेश करने के समय मांगा। इस पर डिवीजन बेंच ने तीन सप्ताह की मोहलत दे दी है। उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने ऋचा जोगी के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को रद कर दिया है। इसके अलावा राज्य शासन ने जाति संबंधी जांच के प्रकरणों की सुनवाई के लिए पूर्व में बनाए गए नियमों में संशोधन कर दिया है। ऋचा ने दोनों ही विषयों को मुद्दा बनाते हुए चुनौती दी है। बुधवार को यह मामला चीफ जस्टिस गोस्वामी व जस्टिस भादुड़ी के डिवीजन बेंच में लगा था। राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी व हस्तक्षेपकर्ता व प्रमुख शिकायतकर्ता संतकुमार नेताम की तरफ से सुदीप श्रीवास्तव उपस्थित थे। याचिकाकर्ता के वकील मुखोपाध्याय की अनुपस्थिति के कारण याचिकाकर्ता की ओर से जवाब पेश नहीं हो सका। कांग्रेस नेता संत कुमार नेताम ने ऋचा जोगी द्वारा मुंगेली तहसीलदार के कोर्ट से हासिल अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए कलेक्टर मुंगेली को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला स्तरीय छानबीन समिति ने ऋचा जोगी को नोटिस जारी कर दस्तावेज पेश करने की बात कही थी। समिति द्वारा जारी नोटिस को ऋचा जोगी ने वकील गैरी मुखोपाध्याय के जरिए हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि उनके पूर्वज वर्ष 1950 के पूर्व से ही मुंगेली जिले के निवासी रहे हैं। उनके पास मौजूद सारे दस्तावेज में गोंड़ जाति का उल्लेख है। जिला स्तरीय छानबीन समिति की रिपोर्ट के आधार पर उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति ने 10 जुलाई 2021 को ऋचा जोगी के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र को रद कर दिया है।

