बैकुंठपुर : कांग्रेस के कद्दावर नेता व मनेंद्रगढ़ जनपद उपाध्यक्ष राजेश साहू के सोनहत स्थित मेसर्स साहू फ्यूल्स में 28 अगस्त की रात खाद्य विभाग की टीम ने छापा मारा। डीजल टैंक में पानी समेत अन्य गड़बडिय़ां पाए जाने पर टीम ने 32 लाख रुपए का पेट्रोल और डीजल जब्त किया। दरअसल सोनहत के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए संचालित 3 एंबुलेंस में साहू फ्यूल्स से ही डीजल-पेट्रोल भरा जाता था। डीजल में पानी मिले होने के कारण 3 एंबुलेंस खराब हो गई थी। इसकी शिकायत बीएमओ ने एसडीएम से की थी। गौरतलब है कि कोरिया जिले के सोनहत बीएमओ ने एसडीएम से लिखित शिकायत की थी कि सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के 3 वाहन तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामगढ़ के 1 एंबुलेंस में मेसर्स साहू फ्यूल्स सोनहत से नियमित रूप से डीजल व पेट्रोल भराया जाता है। 17 अगस्त को एंबुलेंस क्रमांक सीजी 02-7470 के चालक ने बताया वाहन के डीजल फिल्टर में 1 लीटर पानी पाया गया, जिसके कारण नई एंबुलेंस ब्रेक डाउन हो गई, शेष 2 वाहन की स्थिति भी ठीक नहीं है। उसने बताया कि सभी वाहन गुणवत्ताहीन डीजल (Petrol-Diesel) के कारण खराब हो रहे हैं। बीएमओ ने साहू फ्यूल्स सोनहत की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी।
खाद्य विभाग की टीम ने मारा छापा
सोनहत बीएमओ की शिकायत के बाद एसडीएम के निर्देश पर 28 अगस्त की रात जिला खाद्य अधिकारी विष्णु नारायण शुक्ला, सोनहत फूड इंस्पेक्टर सुश्री शुभा गुप्ता व संजय ठाकुर द्वारा मेसर्स साहू फ्यूल्स में छापामार कार्रवाई की गई। इस दौरान डीजल टैंक में पानी मिले होने के कारण पेट्रोल पंप से कुल 31 लाख 94 हजार 632 रुपए का डीजल व पेट्रोल जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान पेट्रोल पंप का मैनेजर अब्दोन मिंज उपस्थित था।
मिलीं ये गड़बडिय़ां, संचालक व मैनेजर पर अपराध दर्ज
खाद्य विभाग की टीम ने जांच में पाया कि साहू फ्यूल्स के डीजल टैंक में पानी भरा है, इस कारण वाहनों में भी पानी मिला डीजल दिया जाता है। इसके अलावा स्टॉक पंजी भी अपडेट नहीं होना, जनसुविधा हेतु फ्री एयर मशीन नहीं होना, मासिक स्टॉक जानकारी खाद्य कार्यालय में प्रतिमाह उपलब्ध नहीं कराना तथा 11 अगस्त तक ही स्टॉक व मूल्य सूची अपडेट पाया गया। खाद्य अधिकारी ने बताया कि फर्म मेसर्स साहू फ्यूल्स के संचालक राजेश साहू व मैनेजर अब्दोन मिंज का उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ मोटर स्पिरिट तथा हाई स्पीड डीजल ऑयल (अनुज्ञापन तथा नियंत्रण) आदेश 1980 की कंडिका 3 (1)(4)(5) एवं (10) का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की गई।

