टीकम निषाद/देवभोग : राज्य और केंद्र सरकार हम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सड़क सुधार के नाम पर लाखों रुपए पानी की तरह बहाती है। लेकिन ऐसे बड़ी लागत की कार्य कमीशन खोरी का बलि चढ़ जाता है। कुछ इस तरह माझी पारा शिशु मंदिर से गिरसूल मार्ग पर हुई मरम्मत मैं देखने को मिल रहा है। क्योंकि महज 10 माह के भीतर ही गुणवत्ता हिन मरम्मत की पोल खुल गई है। सड़क पर गड्ढे के अलावा कई जगह बुरी तरह सड़क दबा हुआ है। सबसे ज्यादा तो गिरसूल पुलिया के ऊपर किए मरम्मत की हालत खराब हुई है। मरम्मत उखड़ने के चलते सड़क किनारे काफी गहरा गड्ढा हुआ है। जो आवागमन करने वाले लोगों को मौत का न्योता दे रहा है। जिस से बेखबर अधिकारी भी सड़क की स्थिति जानने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। क्योंकि गुणवत्ता हिन मरम्मत की लगभग अधिकारियों ने शत-प्रतिशत राशि जारी कर दिया है। शायद यही वजह है कि ना ठेकेदार को सड़क की हालत पर तरस आता है। और ना जिम्मेदार इंजीनियर की ओर से कोई पहल होती है। मतलब जिला और प्रदेश शीर्ष अधिकारियों की निगरानी से कोसों दूर होने का फायदा स्थानीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार ने भी जमकर उठाया है। जिसका खामियाजा अब 8 गांव के हजारों लोगों को उठाना पड़ रहा है। मरम्मत खस्ताहाल सड़क की स्थिति देख जानकारों का मानना है। कि महज आने वाले 3 माह के भीतर किए गए मरम्मत पूरी तरह उखड़ जाएगा। क्योंकि क्वालिटी दार मटेरियल का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं हो पाया यही कारण है कि 10 महीना बाद सड़क खराब हो गई जिसके लिए सिर्फ और सिर्फ साइड इंचार्ज को जिम्मेदार माना जा रहा है। क्योंकि इंजीनियर की मौजूदगी नहीं ठेकेदार ने गुणवत्ता ही मरम्मत को अंजाम दिया जिसका मूल्यांकन का सत्यापन भी आंख बंद कर किया गया। तभी ठेकेदार को पूरी पूरी राशि जारी करने का आरोप लगाए जा रहे हैं। जिसकी शिकायत प्रभारी मंत्री के अलावा पीडब्ल्यूडी मंत्री से भी पत्राचार के माध्यम से करने की तैयारी में है
कमीशन खोरी की भेंट चढ़ा लाखों का सड़क मरम्मत प्रभारी मंत्री से होगी शिकायत

