रायपुर : महावारी के दौरान हाइजीन और जागरुकता को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर काजल श्रीवास ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को डाक के माध्यम से पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि माहवारी के पहले दिन असहनीय पीड़ा होती है इसलिए 12 से 25 वर्ष आयु की किशोरियों और युवतियों को पीरियड्स के पहले दिन स्वेच्छिक अवकाश दिया जाए। स्कूल के पाठ्यक्रम में माहवारी पर पाठ हो ताकि बच्चियों को समझाया जा सके। इसके अलावा लड़कियों के स्कूल में वेंडिंग मशीन की व्यवस्था हो जिससे कि पीरियड्स आने पर उन्हें पैड न होने पर शर्मिंदगी हो। काजल ने सीएम को राखी भी प्रेषित की है।
बेहोश होकर गिर गई थी
काजल ने बताया, जब मुझे पहली बार पीरियड्स आए थे तो मैं बेहोश होकर गिर गई थी। ये इसलिए हुआ कि मुझे खुुद माहवारी को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। मैं उन पैरेंट्स को भी सलाह देना चाहूंगी कि बेटियों को इसकी जानकारी समय रहते देवें। पीरियड्स को लेकर बच्चे भी मां-बाप से खुलकर बात करें।
कौन हैं काजल
काजल सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर हैं। लाखों की संख्या में उनके फॉलोअर्स हैं। हाल ही में उन्होंने हाल ही में छत्तीसगढ़ यूथ आर्टिस्ट एसोसिएशन के गठन किया है। यूनिसेफ ने कोरोना जागरुकता कार्यक्रम के लिए वीडियो बनाने अनुबंधित भी किया है।
ये लिखा है पत्र में
मेरे साथ छत्तीसगढ़ के 3,50,000 से भी अधिक युवा परिवार सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े हुए हैं और समय-समय पर अपनी समस्याओं को मुझ तक पहुँचाते रहते हैं। जिसमें नारी वर्ग की समस्या मुख्य है। आप छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री होने के साथ साथ छत्तीसगढ़ के हर एक नारी के लिए पिता व बड़े भाई भी हैं। उसी नाते छत्तीसगढ़ के सभी नारी वर्ग के तरफ से आपको यह पवित्र रक्षासूत्र भेज कर उपहार के रूप में हमारी उन समस्याओं के समाधान को आशीर्वाद के रूप में मांग रही हूँ,
– भगवान ने इस संसार के हर नारी को उपहार के रूप में पीरियड ( माहवारी ) दिया है। जब हमें पीरियड आता है तो उसके पहले दिन बहुत ही ज्यादा असहनीय दर्द होता है। और यह दर्द कभी इतना ज्यादा होता है कि हमें चक्कर या बेहोशी भी आ जाती है। फिर भी हमें मजबूर होकर स्कूल, आफिस जाना पड़ता है। 12 से 25 वर्ष तक के आयु वाले नारी वर्ग के लिए प्रत्येक माह में 1 दिन की स्वैच्छिक अवकाश की घोषणा कर करें।
– बिलासपुर की रहने वाली एक बहन का दु:ख आपको बताना चाहती हूँ कि उस बहन को जब पहली बार पीरियड आया तो वह स्कूल में थी और स्कूल में सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं था। जिस कारण उसके शरीर से निकलने वाला खून उसके कपड़ों में लग गया। उसे छोटी सी उम्र में सभी के सामने बहुत ही शर्मिंदगी महसूस हुई। साथ ही उसे इतना मानसिक दुष्प्रभाव से गुजरना पड़ा कि परीक्षा के दिन माहवारी नहीं होने पर भी डर के कारण सेनेटरी पैड पहन कर बैठना पड़ा। हर स्कूल व कॉलेज में सेनेटरी पैड के वेंडिंग मशीन को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं।
– एक सर्वे के अनुसार 70 प्रतिशत लड़कियों को माहवारी के विषय में पहले से जानकारी न होने के कारण पीरियड के शुरुआती दिन में असहज होना पड़ता है। इसलिए स्कूली पाठ्यक्रम में पीरियड के विषय को शामिल कर उसकी शिक्षा दी जाए।

