- मोबाईल एम्बुलेंस क्लीनिक से हाट-बाजारों में आने वाले ग्रामीणों को निःशुल्क ईलाज के साथ मिलेगी दवाईयां
- जरूरतमंदों के पास पहुंचा अस्पताल, लंबी दूरी तय न कर पाने वाले बुजुर्गों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
- 38 हाट-बाजारों में प्रारंभ की गई है सेवाएं, चक्रिय क्रम में अन्य बाजारों को किया जायेगा शामिल
आफताब आलम/बलरामपुर : 60 वर्षीय श्रीमती पुष्पा बताती हैं कि उन्हें रक्तचाप की समस्या है तथा बाहर न जाने के कारण वह डॉक्टर नहीं दिखा पा रही थी। अब अस्पताल घर के सामने ही बाजार में आने लगा है तो अब उन्हें यह समस्या नहीं होगी और उन्हें ईलाज के साथ दवाईयां भी मिल गयी है। श्रीमती पुष्पा के साथ अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन के इस पहल की सराहना की तथा डॉक्टरों का धन्यवाद दिया। लंबी दूरी तय न करने वाले उम्र-दराज लोगों के लिए तो यह किसी उपहार से कम नहीं है, प्रशासन ने उनके दरवाजे तक अस्पताल पहुंचा दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं की सहज उपलब्धता तथा दूरस्थ अंचलों तक इसका दायरा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक एक प्रभावी योजना है। इसे अधिक विस्तार देते हुए जिला प्रशासन द्वारा 06 मोबाईल क्लीनिक एम्बुलेंस हाट-बाजारों के लिए प्रदाय किया गया है। मोबाईल एम्बुलेंस क्लीनिक के माध्यम से चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के दल द्वारा हाट-बाजारों में लोगों का निःशुल्क इलाज कर दवाईयां दी जा रही है। प्रशासन के निर्देशानुसार वर्तमान में 38 हाट-बाजारों के लिए मोबाईल एम्बुलेंस की सेवा शुरू की गई है तथा सभी हाट-बाजारों को चक्रिय क्रम में मोबाईल एम्बुलेंस की सेवा से जोड़ा जायेगा। हाट-बाजारों में आने वाले ग्रामीणों को गैर संचारी रोगों की सेवाएं तत्काल मिल पाएगी तथा अन्य बीमारियों के लिए उचित सलाह दी जायेगी तथा आवश्यकतानुसार मरीजों को रेफर भी किया जायेगा। मोबाईल एम्बुलेंस चलता-फिरता अस्पताल बन गया है जहां डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाएं निःशुल्क मिल रही हैं।
मोबाइल एम्बुलेंस क्लीनिक के संचालन के पहले दिन विकासखण्ड बलरामपुर के संतोषीनगर (बरदर) ग्राम में लगने वाले हाट-बाजार में लोगों का ईलाज किया गया। एम्बुलेंस क्लीनिक द्वारा हाट-बाजार में पहुंचे कुल 68 लोगों ने अपना ईलाज कराया, जिसमें 06 वृद्ध व्यक्ति भी शामिल थे। अस्पताल लोगों तक पहुंच गया है इससे ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएगी तथा लोगों का प्रशासन के बीच भरोसा और मजबूत होगा।

