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चका-बुका नाले पर 75 मीटर के उच्च स्तरीय पुल से क्षेत्रवासियों की समस्याएं हई खत्म

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  • उद्योग मंत्रा श्री कवासी लखमा ने सौतनार-कचीररास पुल का किया लोकार्पण
बालकृष्ण मिश्रा/सुकमा : बरसात के मौसम में सौतनार, काचीररास सहित आसपास के ग्रामवासी अब बिना किसी खतरे के उफनते चका बुका नाले को पार कर पाएंगें। अब उन्हें  तैर कर नाले के दूसरी ओर जाने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा। सौतनार काचीररास सहित आसपास के ग्रामवासियों को बरसात के मौसम में होने वाली परेशानी का समाधान आज उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने कर दिया। उन्होंने पुसपाल-कवासीरास मार्ग पर चका बुका नाले पर निर्मित 75 मीटर पुुल का लोकापर्ण किया। इस पुल की चाहत ग्रामीणों को बड़े लम्बे अरसे से रही हैं, जो आज जाकर पूरी हुई। पुल निर्माण से सौतनार, काचीररास, चितलनार, गोविंदपाल, मुण्डवाल सहित क्षेत्र अन्तर्गत अन्य ग्राम के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी। 249.08 लाख की लागत से निर्मित 75 मीटर पुल के शुरुआत से अब ग्रामीण बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, बाजार, तहसील कार्यालय, स्कूल आदि जाने में सुविधा मिलेगी।
कुमाकोलेंग में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए आवास का किया भूमिपूजन
उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा ने संवेदनशील ग्राम कुमाकोलेंग में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए 2 नग एच टाईप आवास निर्माण का भूमिपूजन किया। 21.40 लाख की लागत से बनने वाले इन आवासों से कुमाकोलेंग ग्राम के ग्रामीणों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो होगी। आवास के निर्माण होने से डॉक्टर, नर्स व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की हर समय उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे ग्रामीणों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्यगत समस्याओं का निदान त्वरित रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिले के विकास के लिए संवेदनशील अंदरूनी ग्रामों का विकास जरूरी है। यहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार से ही सम्भव है। उन्होंने सभा में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बेहतर शिक्षा ग्रहण के लिए प्रेरित किया। इसके लिए उन्होंने बताया कि तोंगपाल में कॉलेज का निर्माण किया जाएगा, जिससे छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अन्य जिलों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। इसके लिए जिले के प्रत्येक विकासखण्ड में अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की शुरूआत की जा रही हैं। जिससे ग्रामीण अंचल के गरीब तबके के बच्चे भी निःशुल्क अंग्रेजी शिक्षा का लाभ लेकर भविष्य में उच्च पदों पर सेवाएं प्रदान कर प्रदेश के साथ ही आदिवासी समाज का विकास करेंगे।
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