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प्रतिदिन 60 जांच से लैब की हुई थी शुरुआत, आज राज्य में कोविड जांच के लिए निभा रहे अहम भूमिका

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रायपुर । प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज रायपुर में प्रतिदिन 60 जांच से लैब की शुरुआत कर आज राज्य में कोविड जांच के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. निकिता शेरवानी ने बताया कि कोविड लैब को चलाने के लिए पूरी टीम ने जो प्रयास किया वह सराहनीय है। हमारी टीम में ज्यादातर महिलाएं हैं, जो पूरी ऊर्जा से कार्य कर रही हैं। इस दौरान लैब के कई लोग और उनसे जुड़े लोग कोरोना पॉजिटिव भी हुए पर इस दौरान लैब का काम पूरी ऊर्जा और ईमानदारी के साथ किया गया और सभी अपनी ड्यूटी पर लगे हैं। वैज्ञानिक डॉ. नेहा सिंह ने बताया जब लैब की शुरुआत हुई थी, तब यानी 15 अप्रैल 2020 से 60 कोविड-19 आरटीपीसीआर जांच प्रतिदिन होती थी, वहीं अब 1,000 से 1,200 आरटीपीसीआर जांच प्रतिदिन की जा रही है। यह टीम की मेहनत और लगन का ही नतीजा है।

वैश्विक महामारी से निपटने को हुई खास व्यवस्था

वैश्विक महामारी से निपटने और अधिक से अधिक कोरोना की जांच राज्य में कराए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पहली बार वायरोलॉजी लैब की स्थापना राजधानी में की गई। साथ ही इसके सेटअप के लिए विशेष पद सीनियर साइंटिस्ट सृजित हुआ, ताकि राज्य में कोरोना जांच के अलावा आरटीपीसीआर अथवा अन्य साइंटिफिक लैब गतिविधियों के संचालन को पूर्ण करने, माइक्रोबायोलॉजी वायरोलॉजी लैब के प्रबंधन में भूमिका, सीनियर साइंटिस्ट द्वारा प्रोजेक्ट एवं प्रस्ताव बनाने, रिसर्च एवं शोध प्रस्ताव तैयार कर समन्वय करना शामिल है। साथ ही अन्य तरह की विशेष जांच सुविधा मुहैया हो तथा शोध की गतिविधियां भी संचालित हो सकें। इसी के मद्देनजर डॉ. नेहा ने हैदराबाद की नौकरी छोड़कर कोरोना महामारी में सीनियर साइंटिस्ट के रूप में ज्वाइन कर लैब में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

परिवार की चिंता थी सबसे बड़ी चुनौती

वायरोलॉजी लैब में कार्यरत स्टाफ को शुरुआत में 3-3 शिफ्ट में कार्य करना पड़ता था। टीम में ज्यादातर महिलाएं हैं, जिनके छोटे-छोटे बच्चे हैं। शुरुआत में तो बच्चों से दूर ही रहकर उन्हें कार्य करना पड़ता था क्योंकि कोरोना का भय और परिवार संक्रमित न हो जाए, इसका डर हमेशा सताता था। लैब की विभागाध्यक्ष डॉ. निकिता समेत वैज्ञानिक डॉ. नेहा लगभग एक साल अपने परिवार से और बच्चे से दूर रहीं। दरअसल, नए सेटअप और वायरस का खौफ इतना था कि परिवार की चिंता हमेशा से उन्हें सताती थी। हालांकि, वर्तमान में लैब कार्यप्रणाली के लिए प्रोटोकॉल बना है और सभी नियमों का पालन करते हुए अपने परिवार के साथ रह रही हैं।

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