क्राइम वॉच

जब जंगली हिरन को बचाने वन कर्मचारियों का छूटा पसीना भीड़ को हटाने बुलानी पड़ी पुलिस, अफसोस मगर फिर भी नही बच पाई जंगली हिरन की जान

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अनीश सोलंकी/छूरा : जंगल से अपने झुंड से बिछड़कर गांव की तरफ आये जंगली हिरन तालाब में गिरा हिरन को देखने लग गई भारी भीड घन्टो तक हिरन तैरता रहा पानी मे वन कर्मचारी बेबस होकर देखते रह गए और मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करने हिरन ने गवा दी अपनी जान। मामला उदंती सीतानदी वनमंडल के वन परिक्षेत्र इंदागांव वन परिक्षेत्र का है जहां रविवार को 3 बजे के लगभग एक बड़ा बारह सींगों वाला हिरन अपने झुंड से बिछड़कर थाना से लगे मुख्य मार्ग के किनारे तालाब में गिय गया।इस बात की खबर आग की तरह फैल गई देखते ही देखते बारह सिंग वाले हिरन को देखने के लिए हुजूम लग गया भारी भीड़ को चारों तरफ देखकर हिरन घन्टो तक तालाब में तैरता रहा।
इस बात की जानकारी किसी व्यक्ति ने इंदागांव में रहने वाले वाले वन कर्मचारियों को दी वन कर्मचारी वहां पहुचे लोगों को वहां से हटाने के लिए घन्टो भारी मशक्कत करती रही लेकिन हिरन को देखने के लिए भीड़ कम होने की जगह भीड़ और बढने लगी।वन विभाग ने भीड़ को कम करने के लिए पुलिस का सहारा लिया वन कर्मचारियों ने तालाब को चारों तरफ से घेर के रखे लोगो को हटाने के लिए इंदागांव थाने फोन कर मदद मांगी जिसके बाद इंदागांव थाना प्रभारी रामाधर मरकाम ने भीड़ को हटाने  बल भेजा तब कहि बड़ी मशक्कत के बाद हिरन को देखने के लिए भीड़ को हटाया गया।लेकिन तब तक हिरन पानी मे तैर तैर कर तक चुका था बार बार हिरन तालाब से निकलने की कोशिश कर रहा था लेकिन हिरन को देखने लगी भीड़ को देखकर निकल नही पा रहा था तालाब के चारो तरफ बेसरम के पौधों का जाल होने के कारण हिरन का पैर जख्मी हो गया था।वन कर्मचारियों ने पुलिस की मदद से बारह सिंगा हिरन को किसी तरह बाहर तो निकाल लिया लेकिन अफसोस कि बात है कि वो हिरन का जान नही बचा सके पानी के अंदर  कई घन्टो तक तैरते हिरन को बाहर निकालने के कुछ ही घण्टे के बाद बारह सिंगा हिरन की मौत हो गई।जिसके बाद वन विभाग द्वारा मृत हिरन का पोस्टमार्टम करवाकर मृत हिरन का दाह संस्कार करवा दिया। यहा पर यह बताना लाजमी है की है वन परिक्षेत्र इंदागांव के जंगलो में वर्षो से अवैध शिकार व कीमती सैगोन लकड़ी की तस्करी करने वाले तस्कर चांदी काट रहे है इसकी मुख्य वजह यह कि इंदागांव में पदस्थ रेंजर इंदागांव या फिर रेंजर क्वाटर धुरवागुड़ी में न रहकर मैनपुर मुख्यालय में निवास करते है इसी वजह से विभाग के छोटे कर्मचारी भी ज्यादातर नदारद ही रहते है जिसका फायदा शिकारी व लकड़ी तस्करो द्वारा जमकर उठाया जा रहा है।
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