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मनरेगा के मटेरियल कार्य का भुगतान नहीं होने से सरपंचों का हुआ बुरा हाल

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  • विभाग ने रकम रोकी, सरपंचों का घर से निकलना मुश्किल हुआ
अक्कू रिजवी/कांकेर : राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु राज्य सरकार एक से एक उपयोगी योजनाएं बनाती है ताकि गांव वालों का भला हो लेकिन विगत वर्षों से देखा जा रहा है कि ऐसी जनहितकारी योजनाओं में  पंचायत विभाग द्वारा टांग अड़ा दी जाती है और इसके कारण न केवल ग्रामीण क्षेत्रों का विकास रुक जाता है बल्कि विकास का वादा करने वाले तथा अपने पास से खर्च कर देने वाले सरपंच तथा अन्य जनप्रतिनिधि कहीं मुंह दिखाने लायक ,रास्ता चलने लायक, और कभी कभी घर से भी नहीं निकलने लायक हो जाते हैं । कांकेर ब्लॉक में पंचायत विभाग द्वारा यही तमाशा किया जा रहा है । यहां के पंच सरपंचों ने विकास कार्यों में अनेक प्रकार के कार्य ग्रामीण मजदूरों से कराए जिनमें से मनरेगा का पैसा तो मिल गया है लेकिन जो मटेरियल मार्केट से खरीदा गया है और जिसके कारण विकास कार्य हो सके हैं ,उनकी मज़दूरी तथा खरीदी गई सामग्री का रीएंबर्समेंट का पैसा जनपद पंचायत विभाग ने रहस्यपूर्ण तरीके से रोक कर रखा हुआ है और इसका कोई कारण भी नहीं बता रहे हैं। इसकी वजह से कांकेर ब्लॉक के पंच सरपंचों को कहीं मुंह दिखाना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि ग़रीब मज़दूर ग्रामीण उन्हीं से आश्वासन पाकर काम करते थे और उनका पारिश्रमिक मांगना बिल्कुल सही है लेकिन विभाग पैसा दे तब तो सरपंच लोग पेमेंट करें ? अपनी जेब से कोई कहाँ तक करेगा? इसी कारण अनेक पंच सरपंच घरों से निकल नहीं पा रहे हैं क्योंकि 1या 2 नहीं सैकड़ों लोगों के तगादे सुनने पड़ते हैं । इन सब कठिनाइयों का ज़िक्र करते हुए ब्लॉक कांग्रेस के नेता तथा जनपद पंचायत कांकेर के अध्यक्ष रामचरण कोर्राम जी ने इस प्रतिनिधि को बताया कि गांव वाले अपनी कठिनाइयों को कलेक्टर महोदय को भी बता चुके हैं । इस पर कलेक्टर महोदय ने 15 दिन का समय मांगा है लेकिन अब तक ऐसा नहीं लग रहा है कि कुछ सकारात्मक कार्यवाही हो रही हो और ग्रामीणों की समस्या हल करने में कलेक्टर साहब कुछ दिलचस्पी ले रहे हों।
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