नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान वास्तव में छुआछूत की उसी मानसिकता को दर्शाते हैं, जिसे भारतीय संविधान ने अपराध बनाया है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में इस समय दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है। एक तरफ संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की विचारधारा है, जबकि दूसरी तरफ BJP और RSS की विचारधारा है। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हलद्वानी की घटना पर जल्दी से जल्दी FIR दर्ज होनी चाहिए।
‘शुद्धीकरण’ को लेकर BJP-RSS पर निशाना
राहुल गांधी ने कहा, “हमारे राजस्थान के CLP नेता एक मंदिर जाते हैं और BJP के नेता शुद्धीकरण करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और संविधान के लिए समर्पित कर दिया, वे हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं और वहां शुद्धीकरण किया जाता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा BJP और RSS के लोग करते हैं और यह संविधान के तहत अपराध है। राहुल गांधी ने कहा कि ‘शुद्धीकरण’ वास्तव में छुआछूत का दूसरा नाम ह
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान ने छुआछूत को समाप्त कर दिया है, लेकिन उनके अनुसार BJP के लोग इसे खुले तौर पर व्यवहार में ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी दलित व्यक्ति के किसी स्थान पर जाने के बाद उसका ‘शुद्धीकरण’ किया जाता है तो इसका संदेश यही जाता है कि दलित को छुआ नहीं जाना चाहिए या दलित अशुद्ध है। हालांकि, हल्द्वानी के मामले में BJP ने इस आरोप से दूरी बनाई है। BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पहले इस घटना की निंदा करते हुए कहा था कि पार्टी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच का आश्वासन दिया था।
क्या है हल्द्वानी का पूरा विवाद?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, 10 अगस्त को, श्री राम सेना नाम के एक संगठन से जुड़े लोगों ने वहां हवन और कथित ‘शुद्धीकरण’ अनुष्ठान किया।
इस घटना के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरगे के दलित होने की वजह से कार्यक्रम स्थल का शुद्धीकरण कराया गया। BJP ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पार्टी का इस आयोजन से कोई संबंध नहीं था। दूसरी ओर, संबंधित संगठन की ओर से दावा किया गया कि कांग्रेस की सभा के दौरान कथित आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे और रामलीला मैदान की धार्मिक-सांस्कृतिक मर्यादा को लेकर यह अनुष्ठान किया गया।
खड़गे ने इस घटना को खुद के लिए अपमानजनक बताते हुए छुआछूत कानून के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इस घटना ने उन्हें छुआछूत की पीड़ा महसूस कराई।
‘दलित बच्चों से स्कूलों में साफ-सफाई कराई जाती है’
राहुल गांधी ने अपने भाषण में हल्द्वानी की घटना को व्यापक जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए देश में दलितों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों से दलितों को अत्याचार और हिंसा का सामना करना पड़ा है। संविधान ने इस तरह के भेदभाव को गैरकानूनी बनाया, लेकिन आज भी उनके मुताबिक कई जगहों पर दलित बच्चों से स्कूलों में शौचालय साफ कराने, झाड़ू लगाने और फर्श साफ करने जैसे काम कराए जाते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि इसका आने वाली पीढ़ियों के मन पर गहरा असर पड़ता है। उनके अनुसार, एक बच्चा अपने साथी को झाड़ू लगाते हुए देखता है और दूसरा बच्चा यह देखता है कि कुछ बच्चों को यह काम नहीं करना पड़ता। इससे सामाजिक भेदभाव की मानसिकता आगे बढ़ती है।
‘गांव के कुएं से पानी नहीं लेने दिया जाता’
राहुल गांधी ने ग्रामीण भारत में जातिगत भेदभाव के उदाहरणों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर दलितों को गांव के साझा कुएं से पानी लेने की अनुमति नहीं होती और उन्हें मजबूर होकर अपने लिए अलग कुएं खोदने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि चाय की दुकानों पर भी कथित तौर पर अलग-अलग तरह के कपों का इस्तेमाल किया जाता है। राहुल गांधी के मुताबिक, एक कप ऐसा होता है जिसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि दलितों के लिए अलग कागज या प्लास्टिक के कप दिए जाते हैं जिन्हें इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक राज्य की समस्या नहीं है बल्कि उनके अनुसार उत्तर प्रदेश, उत्तर भारत और देश के शहरों एवं गांवों में भी जातिगत भेदभाव के ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं।
संविधान में छुआछूत पर क्या प्रावधान है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को समाप्त करता है और इसके किसी भी रूप में व्यवहार को प्रतिबंधित करता है। इसके अलावा, छुआछूत से जुड़े कृत्यों के लिए Protection of Civil Rights Act, 1955 के तहत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
BJP ने क्या कहा?
हल्द्वानी विवाद पर BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया है। BJP का कहना है कि जिस संगठन ने अनुष्ठान किया, उसका पार्टी से सीधा संबंध नहीं है। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, बाद में उत्तराखंड BJP अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस विवाद को फिर हवा देते हुए कहा कि कांग्रेस की सभा में कथित तौर पर ऐसे नारे और गतिविधियां हुई थीं जो रामलीला मैदान की धार्मिक प्रकृति के अनुरूप नहीं थीं।

