नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुवार, 13 अगस्त को केंद्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कड़ी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने यह आलोचना ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के पैकेट पर चेतावनी वाले लेबल लगाने में देरी को लेकर की। एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने कहा, ‘यह आपका आखिरी मौका है। अगली बार हम फैसला सुनाएंगे।’
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेट के लेबल को लेकर दी चेतावनी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने केंद्र को अपना अंतिम फैसला रिकॉर्ड पर रखने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार कोई अंतिम फैसला नहीं लेती है, तो वह निर्देश जारी करेगा। बेंच ने साफ-साफ कहा कि सरकार या तो प्रस्तावित चेतावनी लेबल को खुद लागू करे या फिर अदालती दखल का सामना करे।
कोर्ट ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यह मामला जन स्वास्थ्य, खासकर बच्चों की सेहत से जुड़ा है। कोर्ट ने पोषण से जुड़ी सख्त चेतावनियों को लागू करने में सरकार की हिचकिचाहट पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछे सवाल
सुनवाई के दौरान बेंच ने पूछा, ‘क्यों? क्या आप नहीं चाहते कि इस देश के लोग स्वस्थ रहें? खासकर बढ़ते हुए बच्चे?’ केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने तर्क दिया कि चेतावनी के सख्त मानक लागू करने से पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। बृजेंद्र चाहर ने कहा कि नमकीन जैसे उत्पादों पर फैट या नमक की मात्रा के कारण लाल चेतावनी वाले निशान लग सकते हैं।

