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IPS Ratanlal Dangi Case में हाईकोर्ट सख्त, PHQ और गृह सचिव से मांगा जवाब

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High Court takes a tough stance in the IPS Ratanlal Dangi case; seeks a response from the PHQ and the Home Secretary.

IPS Ratanlal Dangi Case : बिलासपुर। आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ पीड़िता की शिकायत और जांच प्रक्रिया को लेकर दायर रिट याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट बिलासपुर में सुनवाई हुई। मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस मुख्यालय रायपुर और सचिव गृह विभाग को तत्काल जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 वाले सप्ताह में होगी।

याचिका के अनुसार, IPS रतनलाल डांगी की प्रताड़ना से तंग पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष उपस्थित होकर आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कथित तौर पर डांगी से जुड़ी कई संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया था। इनमें रायपुर के धरमपुरा, राजिम, कटघोरा में 23 एकड़ जमीन, बिलासपुर की पाल्मसिटी कॉलोनी सहित राजस्थान के नागौर, मकराना, डीडवाना, जयपुर, बीकानेर और अन्य स्थानों पर कथित संपत्तियां शामिल हैं।

अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी जांच

शिकायत के बाद अक्टूबर 2025 में पुलिस महानिदेशक द्वारा मामले की जांच के लिए आईजीपी आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी और डीआईजीपी मिलना कुर्रे को सहायक जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने की बात याचिका में कही गई है। इसी दौरान गृह विभाग के सचिव द्वारा आईपीएस रतनलाल डांगी को निलंबित किए जाने का भी उल्लेख है। पीड़िता ने जांच प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में रिट याचिका दायर की।

 

जांच अधिकारियों की नियुक्ति पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि डीआईजीपी मिलना कुर्रे अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच रतनलाल डांगी से एक रैंक नीचे के पद पर पदस्थ थीं, जबकि आईजीपी आनंद छाबड़ा उसी अवधि में रतनलाल डांगी के समान रैंक पर पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ थे। याचिका में दोनों जांच अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए गए। पीड़िता का आरोप है कि जांच अधिकारी उसके खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्य कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि निलंबन की तारीख से 90 दिनों के भीतर रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप पत्र जारी नहीं किया गया।

 

सीनियर और महिला IAS अधिकारी से जांच की मांग

पीड़िता ने केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के समक्ष आपत्ति आवेदन प्रस्तुत कर दोनों आईपीएस अधिकारियों को जांच से हटाने और मामले की जांच किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तथा महिला आईएएस अधिकारी से कराने की मांग की थी। याचिका के अनुसार, इन आवेदनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद पीड़िता ने हाईकोर्ट का रुख किया। 12 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस मुख्यालय रायपुर और गृह विभाग के सचिव से जवाब मांगा है। अब इस मामले में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद आगे की सुनवाई 31 अगस्त 2026 वाले सप्ताह में होगी।

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