बालोद | 06 अगस्त 2026 | जनहित में समर्पित समाचार : बालोद शहर के नयापारा मंच के समीप खड़ा एक हाईटेंशन बिजली पोल इन दिनों अपनी अलग ही पहचान बना चुका है। पहली नजर में इसे देखकर ऐसा लगता है मानो किसी ने “तार सजाओ प्रतियोगिता” आयोजित कर दी हो। बिजली, इंटरनेट, ब्रॉडबैंड, केबल या फिर कोई और लाइन—जिसे जहां थोड़ी-सी जगह मिली, उसने वहीं अपना दावा ठोक दिया।
अब सवाल यह है कि यह बिजली का पोल है या “सार्वजनिक तार पार्किंग”? अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में शायद इस पर कपड़े सुखाने की रस्सी भी बंध जाए, तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा।
बारिश का मौसम है, ऊपर हाईटेंशन लाइन और नीचे उलझे तारों का ऐसा नज़ारा कि देखने वाला भी सोच में पड़ जाए—यह व्यवस्था है या अव्यवस्था की आधुनिक कला?
सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि क्या इन सभी तारों को लगाने की बाकायदा अनुमति ली गई थी, या फिर “पहले तार डालो, बाद में देखेंगे” वाली नीति पर काम हुआ? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो आम जनता को भी बताया जाना चाहिए कि आखिर एक ही पोल पर इतनी मेहमाननवाज़ी किस नियम के तहत हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तस्वीरों में ही पोल “मकड़ी के जाल” जैसा दिखाई दे रहा है, तो नियमित निरीक्षण की फाइल शायद अभी भी किसी मेज पर आराम कर रही होगी।
जनता पूछ रही है…
– यह हाईटेंशन पोल है या बहुउद्देश्यीय तार स्टैंड?
– आखिर किस विभाग ने इस “तार महोत्सव” की निगरानी की?
– यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
– और यदि नियम टूटे हैं, तो जिम्मेदार कौन?
जनहित में मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर तकनीकी निरीक्षण कर यह स्पष्ट करे कि कौन-कौन सी एजेंसियों ने पोल का उपयोग किया है, किनकी अनुमति है और किनकी नहीं। साथ ही अनावश्यक एवं जर्जर तारों को तत्काल हटाकर व्यवस्था को सुरक्षित बनाया जाए।
व्यंग्य अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि विभाग इस “मकड़ी के जाल” को सिर्फ देखकर नहीं, बल्कि सुलझाकर भी दिखाएगा।
संवाददाता फिलिप चाको

