पूरा कबीरधाम जिला इन दिनों एक ही चर्चा में डूबा हुआ है। चाय दुकानों, पान ठेलों, चौक-चौराहों और सरकारी दफ्तरों के गलियारों में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसा कौन सा “जादुई अधिकारी” है जो पिछले 12 वर्षों से जिले में कुंडली मारकर बैठा हुआ है।
लोगों का कहना है कि सरकारी नियम साफ कहता है कि किसी भी अधिकारी का एक जिले में लंबे समय तक टिकना प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ माना जाता है। सामान्यतः ढाई से तीन साल में तबादला होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और विभाग में जवाबदेही खत्म न हो। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग का यह अधिकारी हर सरकार में अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहा।
चाय पर बैठे लोगों का कहना है कि कांग्रेस सरकार आई तब भी यही अधिकारी जिले में जमे रहे, भाजपा सरकार आई तब भी कुर्सी नहीं हिली, उससे पहले भी सत्ता बदली लेकिन विभाग प्रमुख की कुर्सी नहीं बदली। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन सी ऐसी “ऊपरी सेटिंग” है जो हर शासन और हर बड़े अधिकारी के साथ तालमेल बैठा लेती है ?
चर्चा तो यहां तक है कि महिला एवं बाल विकास विभाग में जितने भी बड़े खेल हुए, चाहे पोषण आहार की खरीदी हो, आंगनबाड़ी सामग्री वितरण हो, भवन निर्माण हो, बच्चों और महिलाओं की योजनाओं में गड़बड़ी हो या फर्जी बिल-वाउचर का मामला, हर भ्रष्टाचार की परछाई इसी अधिकारी के आसपास दिखाई देती है।
लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि जिले में सरकार बदलती रही, मंत्री बदलते रहे, कलेक्टर बदलते रहे,लेकिन विभाग का स्थायी राजा नहीं बदला। जनता के बीच यह भी चर्चा है कि अगर किसी छोटे कर्मचारी पर आरोप लग जाए तो तत्काल कार्रवाई हो जाती है लेकिन बड़े अधिकारियों पर वर्षों से गंभीर आरोप लगने के बाद भी जांच फाइलों में धूल खाती रहती है
चाय पर चर्चा में बैठे बुजुर्गों का कहना है कि इतने वर्षों तक एक ही जगह बैठा अधिकारी विभाग नहीं, पूरा सिस्टम कंट्रोल करने लगता है।लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक एक ही जिले में रहने से विभाग में ऐसा नेटवर्क बन जाता है कि कोई कर्मचारी खुलकर शिकायत करने की हिम्मत नहीं करता।
अब जनता पूछ रही है कि क्या सरकार और प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराएगा ? क्या पिछले 12 वर्षों में महिला एवं बाल विकास विभाग में हुए कार्यों का ऑडिट होगा ? क्या योजनाओं के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार की परतें खुलेंगी
फिलहाल कबीरधाम में चाय की हर चुस्की के साथ एक ही सवाल गूंज रहा है
आखिर इस अधिकारी के सिर पर किसका हाथ है, जो 12 साल से कुर्सी छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा
पत्रकार दीपक तिवारी

