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Supreme Court on Bail: ‘आज़ादी सबसे कीमती अधिकार’ …जमानत मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

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Supreme Court on Bail: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने सोमवार को कहा कि हाई कोर्ट्स में सालों से हजारों जमानत याचिकाओं का लंबित रहना आजादी के कीमती अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी करने की जरूरत को खत्म किया जा सकता है, बशर्ते याचिका की एक कॉपी पहले से ही अभियोजन पक्ष को दे दी जाए, ताकि वे सुनवाई के पहले ही दिन अपना जवाब दे सकें।

SC ने आगे कहा कि, “अभी कोर्ट्स में आम तौर पर यह तरीका है कि वे आरोपी की जमानत याचिका पर नोटिस जारी करते हैं और राज्य सरकार, जांच एजेंसी या संबंधित अभियोजन पक्ष से जवाब मांगते हैं।

जवाब कई हफ्तों बाद दाखिल होता है, जिससे किसी आपराधिक मामले में न्यायिक या पुलिस हिरासत से रिहाई की याचिकाओं के निपटारे में देरी होती है। आरोपी की आजादी की रक्षा का मतलब यह नहीं है कि, पीड़ित के अधिकारों की अनदेखी की जाए।”

CJI ने मद्रास हाई कोर्ट की तारीफ की

इसके साथ ही मद्रास हाई कोर्ट को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने जमानत याचिकाओं पर फैसला लेने में सबसे कम समय लेने के लिए तारीफ की। हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट उन कोर्ट्स में से है जहां जमानत याचिकाएं बहुत ज्यादा लंबित हैं, फिर भी बेंच ने इस बात की तारीफ़ की कि वहां लंबित मामलों की संख्या भी बहुत ज्यादा है, और जजों को रोजाना लगभग 200 जमानत याचिकाओं की सुनवाई करनी पड़ती है।

इस बात पर जोर देते हुए कि जमानत याचिकाओं की तेजी से सुनवाई अपराध के पीड़ितों के अधिकारों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए, बेंच ने कई निर्देश जारी किए। इनमें एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के जरिए उन जमानत याचिकाओं को, जिन पर पहले ही सुनवाई हो चुकी है, हर पखवाड़े कम से कम एक बार सुनवाई के लिए अपने आप दोबारा लिस्ट करना भी शामिल है।

जमानत याचिका की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश

जमानत याचिका की सुनवाई में तेजी लाने के लिए बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट्स एक ऐसा तरीका विकसित करने के लिए कदम उठाए। जिससे सरकार, जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को सुनवाई टालने की मांग करने से रोका जा सके। ऐसा करके उन्हें, संविधान द्वारा गारंटीकृत सबसे कीमती मौलिक अधिकार की रक्षा करने के कोर्ट के गंभीर कर्तव्य की याद दिलाई गई।

SC ने पाया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस (NDPS) एक्ट के तहत कई मामलों में, फोरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्टें तेजी से न मिलने के कारण मुकदमे में देरी हुई। CJI की अगुवाई वाली बेंच ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से कहा कि वे कोर्ट के मामलों में FSL रिपोर्टें तेजी से हासिल करने के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम करें।

 

बेंच ने हाई कोर्ट्स को सुझाव दिया कि वे एक ऐसा पोर्टल बनाएं, जिस पर उनके समक्ष लंबित प्रत्येक जमानत याचिका की स्थिति उपलब्ध हो; ताकि आरोपी, अभियोजन पक्ष और अदालत, इन याचिकाओं के शीघ्र निपटारे के लिए सुधारात्मक कदम उठा सकें।

 

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