CG HIGH COURT: बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में अपनी इकलौती संतान खोने वाली दंपती को 55 वर्ष की उम्र में आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन के जरिए दोबारा माता- पिता बनने की अनुमति दी है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि संतान सुख भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। बिलासपुर के हाई कोर्ट कॉलोनी में रहने वाली 49 वर्षीय महिला और उनके 55 वर्षीय पति ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें बताया कि वर्ष 2022 में उनकी इकलौती बेटी का असामयिक निधन हो गया था। उन्होंने फिर से परिवार शुरू करने का फैसला लिया और बिलासपुर स्थित एक निजी आईवीएफ सेंटर में परामर्श लिया।
जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल रूप से फिट पाया , लेकिन यह पता चलने पर कि पति फरवरी 2026 में 55 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। एआरटी यानी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एक्ट 2021 की धारा 21(जी) के तहत पुरुष के लिए अधिकतम उम्र 55 वर्ष और महिला के लिए 50 वर्ष तय है, इसी तकनीकी आधार पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने से इनकार कर दिया था।
हाई कोर्ट ने फैसले में कहा कि रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी यानी प्रजनन स्वायत्तता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है। एआरटी एक्ट में उम्र की पात्रता महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग है, न कि सामूहिक। चूंकि याचिकाकर्ता पत्नी की उम्र अभी 50 वर्ष से कम है और वह चिकित्सकीय रूप से योग्य हैं, इसलिए केवल पति की उम्र थोड़ी ज्यादा होने के आधार पर उन्हें मातृत्व के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

