नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय बुधवार यानि आज को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा।
आरोप हैं कि इन लोगों ने आबकारी नीति मामले से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को अलग करने का अनुरोध करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल की याचिका पर अदालत की सुनवाई के वीडियो अपलोड करने के साथ और उसे साझा किया।
वकील वैभव सिंह द्वारा दायर यह जनहित याचिका मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
सिंह ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि अदालत की कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर साझा करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है और उच्च न्यायालय के नियमों के तहत भी निषिद्ध है।
याचिका में दावा किया गया है कि आप के कई नेताओं और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जैसे अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जानबूझकर और सोची-समझी रणनीति के तहत अरविंद केजरीवाल की 13 अप्रैल को न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष पेशी के वीडियो को रिकॉर्ड किया और इसे सोशल मीडिया मंच पर प्रसारित किया, जिसका उद्देश्य जनता की नजरों में अदालत की छवि को धूमिल करना था।
केजरीवाल और उनके पार्टी सदस्यों पर अदालत की कार्यवाही को रिकॉर्ड करने के लिए ‘षड्यंत्र’ रचने और ‘गंदी रणनीति’ अपनाने का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका में मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में 13 अप्रैल, 2026 की अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अपलोड करने, दोबारा पोस्ट करने या अग्रेषित करने वाले सभी प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया है। जनहित याचिका में सोशल मीडिया से सामग्री हटाने की भी मांग की गई थी। इस बीच, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया है।

