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आंजनेय यूनिवर्सिटी में हुआ सरपंच सम्मान सम्मेलन का आयोजन, 150 से अधिक सरपंच हुए शामिल

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रायपुर। आंजनेय यूनिवर्सिटी में सरपंच सम्मान सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया, जिसमें आरंग, अभनपुर, धरसींवा एवं गरियाबंध क्षेत्र से 150 से अधिक सरपंचों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह सम्मेलन ग्रामीण विकास और शिक्षा के सशक्तीकरण के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जहां जनप्रतिनिधियों एवं शिक्षाविदों के बीच सार्थक संवाद हुआ।

 

माननीय चांसलर श्री अभिषेक अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा समाज के समग्र विकास की आधारशिला है और इसमें बेटियों की भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है कि कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए न केवल उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं, बल्कि जागरूकता अभियान, छात्रवृत्ति योजनाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष पहल भी की जा रही हैं, ताकि बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सशक्त भूमिका निभा सकें।

 

कुलपति डॉ टी रामाराव ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा की अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही समय की मांग है। विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

 

महानिदेशक डॉ बी सी जैन ने सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम सभा के प्रथम नागरिक होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अशिक्षा के अंधकार को दूर करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा और शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाना होगा, तभी वास्तविक विकास संभव हो सकेगा।

 

डायरेक्टर डॉ जयेंद्र नारंग ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान में पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक और रोजगारपरक कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में प्रबंधन, विज्ञान, कला, कंप्यूटर और कौशल विकास से जुड़े अनेक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जो विद्यार्थियों को उनके करियर के अनुरूप दिशा प्रदान करते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

 

कार्यक्रम के अंत में सभी सरपंचों का सम्मान किया गया और उनसे अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने ग्रामों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह सम्मेलन शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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