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स्वयं के लिए गुणवत्तापूर्ण समय निकालना विशेष बच्चों के अभिभावक के लिए मानसिक संतुष्टि की कुंजी

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रायपुर । विशेष आवश्यकता वाले अभिभावकों का दैनिक जीवन अत्यंत व्यस्त होता है। इस कारण उन्हें अपने लिए गुणवत्तापूर्ण समय निकालना मुश्किल हो जाता है। व्यस्त दिनचर्या उनके मानसिक तनाव का भी कारण बनती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, जागुक पेरेंट्स एसोसिएशन द्वारा संचालित पियाली फाउंडेशन ने ऐसे अभिभावकों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसका उद्देश्य उन्हें समय-समय पर अपने लिए गुणवत्तापूर्ण समय निकालने के लिए प्रोत्साहित करना है। संस्था का मानना है कि अपने लिए कुछ समय निकालना स्वयं को प्रेरित करने और मनोरंजन के लिए एक अच्छा कदम है। यह कार्यक्रम पॉल हैमलिन फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किए गए जागुक पेरेंट्स एसोसिएशन मनोसामाजिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था। के

 

इस कार्यक्रम में 35 से अधिक विशेष बच्चों के अभिभावकों ने भाग लिया। उन्होंने मनोरंजक गतिविधियों में हिस्सा लिया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक अभिभावक को प्रतिदिन अपने लिए कुछ समय निकालना चाहिए और उसे अपनी इच्छा अनुसार व्यतीत करना चाहिए। कार्यक्रम में संस्था द्वारा प्रेरित अभिभावकों के दो संबल समूहों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। प्रत्येक प्रतिभागी को उनकी भागीदारी के लिए एक उपहार दिया गया और कार्यक्रम में आयोजित खेलों के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम का संचालन सुश्री जया, रागिनी और आशा ने किया, जो रायपुर शहर में विशेष बच्चों के 250 से अधिक अभिभावकों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। संस्था के उपाध्यक्ष जगन्नाथ ने अभिभावकों के छोटे समूह बनाने के महत्व को समझाया, जिससे उन्हें लाभ होगा।

 

अपने लिए कुछ समय निकालना और अपनी इच्छा अनुसार उसका आनंद लेना व्यक्ति के मनोबल को बढ़ाता है। मैंने व्यक्तिगत रूप से ‘स्माइलिंग सोल’ समूह में शामिल होने के बाद इसका अनुभव किया है, संगठन की मुख्य पदाधिकारी और एक विशेष बच्चे की माता डॉ. मीता मुखर्जी ने बताया। मेरे लिए यह अपनी तरह का पहला आयोजन है, जहाँ रायपुर में विशेष बच्चों के माता-पिता को गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। मैं पियाली फाउंडेशन को ऐसे आयोजन के लिए धन्यवाद देती हूँ, एक विशेष बच्चे की माता रीना गुप्ता ने कहा। सचिव श्री राजकिशोर ने कहा कि, ‘संगठन के प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे, जिससे विशेष बच्चों के माता-पिता के साथ मनोवैज्ञानिक और सामाजिक हस्तक्षेप किया जा सकें, जो उन्हें दैनिक जीवन की परिस्थितियों से सुचारू रूप से निपटने में मदद करेगा। कार्यक्रम का समापन श्री विकास ने सभी उपस्थित माता-पिता को धन्यवाद देते हुए किया।

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