प्रांतीय वॉच

शिवशक्ति महायज्ञ में शामिल होकर रूपसिंग साहू ने दी आहुति

Share this
पुलस्त शर्मा/ मैनपुर : गरियाबंद श्री सिद्धिविनायक आश्रम ग्राम नवागांव में  श्री कल्याणनंद गिरि जी महाराज एवं  श्री उमेशनंद गिरि जी महाराज महामंडलेश्वर के सानिध्य में तीन दिवसीय 24 कुंडीय विश्व शांति शिवशक्ति महायज्ञ का आयोजन एवं आयोजक मां तारिणी शक्ति पीठ गुरुजी भाटा (मैनपुर) जिला गरियाबंद वाले समस्त ग्रामवासी महायज्ञ के समापन अवसर पर श्री रूपसिंग साहू सामाजिक कार्यकर्ता एवं कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ रायपुर संभाग ने अतिथि के रुप में शामिल हो कर गुरुदेव जी से क्षेत्र कि सुख,समृद्धि एवं खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा एवं पूर्णा आहुति दी एवं  श्री साहू ने अपने उद्बोधन एवं आशीर्वादवचन के रूप में कहा कि यहां महायज्ञ होने से क्षेत्र के सुख समृद्धि खुशहाली एवं समाज में जागरूकता आती है एवं अयोध्या में बन रहे श्री राम मंदिर में अपना सहयोग के रूप में हर तरह से सहभागी बने जिसमें समाज परिवार गांव क्षेत्र में भगवान श्री राम के आशीर्वाद से दिन दुगनी रात चौगुनी की ओर छत्तीसगढ़ राज्य बढ़ रहा शिव शक्ति कथा के अनुसार शक्ति के शिव में संयुक्त होने को लेकर एक कथा बेहद प्रचलित है इस कथा के अनुसार शिव पार्वती विवाह के बाद शिवभक्त भृंगी ने उनकी प्रदक्षिणा करने की इच्छा व्यक्त की शिव जी ने कहा कि आपको शक्ति की भी प्रदक्षिणा करनी होगी क्योंकि उनके बिना मैं अधूरा हूं भृंगी की जांग पर बैठ जाती है जिससे वे यह काम ना कर सके भृंगी भावरे का रूप धारण कर उन दोनों की गर्दन के बीच से गुजर कर शिव की परिक्रमा पूरी करना चाहते थे तब शिव ने अपना शरीर शक्ति के शरीर के साथ जोड़ लिया अबे वे अर्धनारीश्वर बन गए दोनों के बीच से नहीं गुजार सकते थे शक्ति को अपने शरीर का आधा भाग बनाकर शिव ने स्पष्ट किया कि वास्तव में स्त्री की शक्ति को स्वीकार किए बिना पुरुष पूर्ण नहीं हो सकता और शिव की भी प्राप्ति नहीं हो सकती केवल देवी के माध्यम से ही ऐसा हो सकता है समभाव और सौंदर्य का अनुभव पार्वती साधना के माध्यम से शिव के ह्रदय में करुणा और समभव जगाना चाहती है पार्वती की साधना से अन्य तपस्या की तपस्या से भिन्न है सुर असुर और ऋषि ईश्वर की प्राप्ति और अपनी इच्छा पूर्ति के लिए तपस्या करते हैं पार्वती भी इच्छा एवं वरदान को परे रखकर ध्यान लगाती है वे अपने व्यक्तिगत सुख के लिए नहीं बल्कि संसार के लाभ के लिए तपस्या करती है शिव पुराण के अनुसारनिष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि सती ही पार्वती है वे सोचते हैं कि यदि वे अपने आंख बंद कर लेंगे तो वह काली में बदल जाएगी और उनका भयंकर रूप हो जाएगा अगर यह आंख खुले रहेंगे तो ज्ञान की दृष्टि से ना देखा जाए तो वाह डरावनी हो जाती हैं यदि ज्ञान के साथ देखा जाए तो और सुंदर प्रतीत होती है वही पार्वती शिव को अपना दर्पण दिखाती है जिसमें वे अपना शंकर शांत रूप देख पाते हैं विश्व शांति शिवशक्ति महायज्ञ में श्रद्धालुओं एवं भक्तगण बड़ी तादाद में करीब 2 से 3 हज़ार लोग सहपरिवार शामिल होकर पुण्य के सहभागी बने।
Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *