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सिरगिट्टी बन्नाक चौक पर एमआईसी मेंबर के विरोध के चलते कमर्शियल कंपलेक्स का प्रस्ताव अटका

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सिरगिट्टी बन्नाक चौक पर एमआईसी मेंबर के विरोध के चलते कमर्शियल कंपलेक्स का प्रस्ताव अटका

बिलासपुर|नगर निगम की 5 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना पर कब्जाधारियों और सत्ता के भीतर विरोध के कारण रुकावट आ गया है। सिरगिट्टी बन्नाक चौक से रायपुर रोड की ओर सरकारी जमीन पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की योजना को एमआईसी से मंजूरी नहीं मिल सकी। विस्वस्थ सूत्रों से पता चला है कि विरोध करने वालों में शामिल एक एमआईसी सदस्य के पति की दुकानें भी उस जमीन पर बताई जा रही हैं, जिस पर यह काम्प्लेक्स बनना है। सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या विकास की राह में निजी स्वार्थ दीवार बन रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि विकास कार्य के लिए होता है अपनी निजी स्वार्थ के लिए नहीं,

निगम द्वारा तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सरकारी जमीन पर सुव्यवस्थित कमर्शियल कंपलेक्स और पार्किंग की समस्या का समाधान था। बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, निगम कमिश्नर अमित कुमार और अन्य अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण भी कर लिया था। प्रस्तावित योजना में ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर में दुकानों के साथ अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा शामिल है, लेकिन योजना को एमआईसी की मुहर नहीं लग सकी, क्योंकि सिरगिट्टी वार्ड नंबर 11 की पार्षद और एमआईसी सदस्य केशरी इंगोले ने जोरदार आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि जोन अफसरों ने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी और उन्हें नजर अंदाज किया गया।

आपत्ति की वजह अवैध कब्जे से निजी हित की चर्चा जोरों पर

प्रस्तावित जमीन पर वर्षों से कई अवैध दुकानों का संचालन हो रहा है, जिन्हें हटाने की स्थिति बन रही है। इसे लेकर कब्जाधारी विरोध कर रहे हैं। जिन लोगों की दुकानें वहां बनी हुई हैं, उनमें से दो दुकानें एमआईसी सदस्य केशरी इंगोले के पति सुंदर सिंह की बताई जा रही हैं। ऐसे में आपत्ति को लेकर निजी हितों की बात भी सामने आ रही है। एमआईसी सदस्य का कहना है कि वे पार्षद हैं और उनसे कोई पूर्व चर्चा नहीं की गई इसलिए मुझे आपत्ति है मुझे जगह स्पॉट अधिकारियों को पहले दिखाना चाहिए था कौन सी जगह की बात कर रहे हैं मुझे जानकारी भी नहीं है।

विकास का रोड़ा बना कब्जा, असली टकराव की वजह

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि प्रस्तावित जमीन पर वर्षों से कब्जा कर बनाई गई दुकानों का क्या होगा। निगम के अनुसार ये दुकानें अवैध हैं और नए निर्माण में बाधा हैं। ऐसे में विरोध पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सार्वजनिक हित में है या दुकानों को बचाने की कोशिश जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि बहुमंजिला काम्पलेक्स बनने से क्षेत्र का विकास होगा।

अधिकारी बोले-क्षेत्र के विकास में, विरोध समझ से परे

निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि यह कमर्शियल काम्प्लेक्स बनता है तो इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में सुव्यवस्थित कारोबार और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था भी हो पाएगी। अधिकारियों के अनुसार विरोध केवल व्यक्तिगत हितों के कारण हो रहा है, जबकि यह योजना शहर के हित में है। अब देखना होगा कि निगम इस प्रस्ताव पर सहमति बनाने में कितना सफल होता है और अवैध कब्जों के खिलाफ कितना सख्त रुख अपनाता है।

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