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बस्तर में प्रतिभा की कमी नहीं : गौरव सोनी

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बी. रामू/ किरंदुल। आपके विचार आपको बनाते हैं उचा सोचिए और पूरे दिल से लग जाईए उस को हासिल करने को समय लगता है मगर आप जरूर सफल होंगे सफलता की कहानी कहते हैं छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रतिभा की कमी नहीं बस उन्हें निखरने का मौका मिलना चाहिए हम बात कर रहे हैं दंतेवाड़ा जिला के सुदूर अंचल छोटे से शहर किरंदुल की जहां मात्र 24 वर्ष के उम्र में युवक गौरव सोनी पिता धर्मेद्र सोनी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है उन्होंने बॉलीवुड का सफर इतनी छोटी सी उम्र में ही तय कर लिया। आज किरंदुल ,बचेली , दंतेवाड़ा ही नहीं पूरा प्रदेश गर्व कर रहा है अपने प्रदेश का नाम रोशन करने वाले गौरव सोनी से खास बातचीत की तो उन्होंने अपने अनुभव व बॉलीवुड तक पहुंचने में तय की गई सफर को साझा करते हुए बताया कि कैसे इस बुलंदी तक वह पहुंचे उन्होंने बताया कि दसवीं तक की पढ़ाई किरंदुल में करने के बाद वे 11वीं 12वीं की पढाई भिलाई में की उसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग किया, इंजीनियरिंग करते समय कुछ गुमसुम रहने लगा था किसी से बात नहीं करता था खुद में ही रहना उससे अच्छा लगता था,और जब कोई पूछता तुम अकेले क्यो रहते हो। तो वो बोलते खुद को जान रहा हूं कि में क्या हूं कहा हूं क्यों हूं । गौरव सोनी ने बताया कि कॉलेज के दिनों में एक दिन अखबार में आर्टिकल पढ़ा और दिल्ली में कुलदीप सिंग जी से कांटेक्ट किया सोशल नेटवर्क के जरिए। दिल्ली पहुंचकर ट्रेन से उतरते ही सबसे पहले उनको फोन लगाया शुरू में बात धांगसे नी होने पर घबरा गए मगर फिर उनका कॉल आया और उन्होंने बोला शामको रिहर्सल में मिलो ।और फिर मेरे पास दिल्ली में रूकने की समस्या आ खड़ी हुई और मैं बड़े कलाकारों के इंटरव्यू देखकर मुखर्जी नगर का नाम सुना और रूम खोजने निकल पड़ा
जगह की तलाश करने लगा मगर रूम नी मिली फिर जब थक कर शमको लौट रहा था उसी समय मैंने एक सज्जन अंकल को फोन पर बातें करते सुना कि वे अपनी रूम को किराए से देना चाहता था । मैं उनके पास गया और तुरंत एडवांस दे दिया और फिर रूम में रहने लगा हालांकि वह रूम बहुत छोटा था इसमें सिर्फ एक सिंगल बेड और खड़े होने लायक जगह थी मगर मेरे दिमाग में पहले से था कि रूम सिर्फ रात को सोने के लिए चाहिए था दिनभर काम करना था और साथ साथ में भिलाई आकर मैंने सिविल इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की एग्जाम भी दी , लेकिन कहीं और निकल गया शुरुआत ऐसा हुआ जब मैं कॉलेज के दिनों में था अकेला और गुमसुम रहने लगा तो उस समय मुझे खुद को जानने का मौका मिला मैं खुद से बातें करता था तो चीजें समझ में आती थी क्यों कर रहा हूं और किस लिए कर रहा हूं जीवन में हमेशा एक ख्वाहिश रही है कि जीवन में हर एक चीज करना है और जब तक कोई चीज महसूस ना हो अंदर से महसूस ना हो मुझे लगता है शरीर सिर्फ गुलाम है मतलब की आप कुछ विचार अंदर से करेंगे और शरीर काम करेगा सब कंट्रोल आपके विचारो का है। मुझे महसूस करना था जो भीख मांगता है उसको क्या महसूस होता है पावरफुल आदमी रहता है उसको क्या महसूस होता है और एक दिन न्यूज़पेपर में आर्टिकल पढ़ा तब समझ में आया मुझे एक एक्टर बनना है मुझे यही करना है अपने जीवन में अपने एक्टिंग से रुलाना अपनी कला से हंसाना और उस किरदार को सचे तरीके से आप तक पोहचाना ।उसी के दौड़ में वहां से मैं लग गया और पता किया की कैसे एक्टर बनना है और क्या करना है छत्तीसगढ़ में ऐसा कोई मिला नहीं बताने वाला की मुझे क्या करना है और क्या करना चाहिए सबसे पहले मैं दिल्ली गया और दिल्ली में थिएटर किया जब दिल्ली जा रहा था फाइनल ईयर के लास्ट में मैंने कॉलेज में बोल दिया कि मैं यूपीएससी की कोचिंग करने जा रहा हूं लेकिन मैं दिल्ली थिएटर करने नाटक करने जा रहा था लेकिन कॉलेज में मेरा 0% अटेंडेंस रहा पर मैं दिल्ली गया और कुलदीप सिंग से मिला और नाटक की ,धीरे धीरे फिर सिलसिला शुरू हुआ और फिर लखनऊ, बरेली ,दिल्ली काफी जगह एक्सपोजर करने मिला फिर समझ में आया कि कैसे करना है और क्या करना है बड़े-बड़े लोगों के इंटरव्यू देखता था कि वे अपने रास्ते कैसे तय करते हैं उस समय हमेशा एक चीज सोचता करता था कि वह अपनी जिंदगी का एक पहलू बता रहे हैं उनकी जिंदगी इस समय के हिसाब से अलग है मुझे उनके हिसाब से जिंदगी को तोड़ मरोड़ कर अपने पहलू को भी ऐसी ही बनाना पड़ेगा इनका योगदान रहेगा कि कैसे करना है क्या करना है लेकिन उनके सीख से मुझे खुद के जीवन का रास्ता खुद से ही बनाना है अभी तो सफर जारी है फिलहाल अभी फ्लिपकार्ट में बतौर मॉडल babeon का ब्रांड अंबेडसर हूं और उसके लिए शूट किया था तो अभी फ्लिपकार्ड में अया है उसके अलावा और एक प्रोजेक्ट हाथ लगा है जिसमें मैं भगवान श्री राम का रोल अदा कर रहा हूं रामायण है जो 60 एपिसोड का बनने वाला है उसके अलावा मैंने कास्टिंग डायरेक्टर और कास्टिंग एसिस्टेंट के रूप में काम किया है जिसमें मैंने कौन बनेगा करोड़पति जोमैटो और भी काफी बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है यह सब करने के बाद जब मैं अपने शहर आता हूं और सबसे बहुत ज्यादा स्नेह मिलता है जो लोग मुझे प्यार देते हैं सब कुछ देते हैं तो अंदर से प्रोत्साहन मिलता है कि मैं और कुछ ज्यादा करूं ऐसा करूं कि यहां के लोग में बड़े सपने और उनको पूरा करने का हौसला आए की गौरव इस छोटे से शहर से निकल कर सकता है तो मै भी कर सकता हूं आत्मविश्वास जगाता है
और आप लोगों की दुआ ही है जिससे मुझे एनर्जी मिलती है कि आगे और कुछ करूं और आप देखें मेरा काम तो बोले कि इस लड़के ने बहुत अच्छा काम किया तो मेरा दिल भर आता है यह थी कहानी किरंदुल जैसे छोटे शहर 24 वर्षीय युवक गौरव सोनी की अबतक की कहानी

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