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हमेशा गोल घूमकर ही एक से दूसरे देश क्यों जाता है एरोप्लेन? सीधे नहीं भरता उड़ान, वजह कर देगी हैरान

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कई बार हमें जो चीज जैसी नजर आती है, वैसी असल में होती नहीं है. नजर के फेर में कई बार इंसान ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाता है. आज हम आपको एक ऐसी ही ग़लतफ़हमी के बारे में बताने जा रहे हैं. अगर आप एयरलाइन्स से कई बार यात्रा करते हैं, तो आपने विमान के उड़ान के रूट को लेकर एक अजीबोगरीब चीज नोटिस की होगी. विमान कभी भी एक से दूसरी जगह की उड़ान सीधे रास्ते से नहीं तय करता. वो हमेशा गोलाई में उड़ान भरता है.

जी हां, अगर आपको भारत से अमेरिका जाना है, तो विमान इसके लिए सीधा रास्ता नहीं अपनाती. ये हमेशा नॉर्थ पोल होते हुए ही अमेरिका जाती है. यानी एक गोलाकार रूट बनाते हुए. अब आप जब इस रूट को भारत और अमेरिका के डायरेक्ट रूट से कंपेयर करेंगे, तो पाएंगे कि अरे ये तो लॉन्ग कट है. लेकिन यहीं इंसान की नजरें धोखा खा जाती है. आज हम आपकी ये ग़लतफ़हमी दूर कर देते हैं.

हर विमान अपनाता है कर्व्ड रूट
चाहे कोई भी एयरलाइन्स हो, एक से दूसरी जगह जाने के लिए वो हमेशा कर्व्ड रूट ही अपनाता है. अगर एक से दूसरे देश तक उड़ान भरने के लिए सीधी लकीर खींचें तो ऐसा लगेगा कि सीधा जाना कम दूरी का रास्ता था. लेकिन इसके बाद भी सारे एयरलाइन्स घूमकर ही एक से दूसरे जगह जाते हैं. इसके पीछे ख़ास लॉजिक है. यहां आता है बेसिक साइंस और बेसिक मैथ्स, जिसका धरती के गोल होने से सीधा कनेक्शन है.

पड़ता है शॉर्ट कट
धरती गोल है. ये बात हम सब जानते हैं. ऐसे में अगर धरती के बीच के हिस्से हो देखें तो ये सबसे लंबा है और पोल्स के पास ये नैरो पड़ जाता है. एक से दूसरे जगह जाने के लिए एयरलाइन्स एक ख़ास कांसेप्ट को अपनाती हैं. ये है द ग्रेट सर्कल कांसेप्ट. अगर समतल जगह की बात करें, तो इसमें सीधा जाना हमेशा शॉर्ट कट होता है. लेकिन गोलाई वाली या कर्व वाली जगह पर सबसे छोटा रास्ता होता है द ग्रेट सर्कल. देखने में भले ही हमें लगता है कि गोल घूमकर जाना लंबा पड़ता है. लेकिन असल में वो शॉर्ट कट होता है. इस तरह सीधी यात्रा न कर एयरलाइन्स अपने तेल के काफी पैसे बचा लेती है. है ना मजेदार बात.

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