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अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय ने किया आर्ट ऑफ राइटिंग रिसर्च पेपर पर फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन

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अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय ने किया आर्ट ऑफ राइटिंग रिसर्च पेपर पर फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन

बिलासपुर – अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेटिव डेवलपमेंट सेंटर एवं एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 22 से 27 मई तक आर्ट ऑफ राइटिंग रिसर्च पेपर पर फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम के समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला, माननीय कुलपति, पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति आचार्य दिवाकर नाथ वाजपेई जी ने की । समापन समारोह कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. एच.एस. होता ने स्वागत भाषण दिया उन्होंने अपने स्वागत भाषण में रविशंकर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय का कार्यक्रम में उपस्थित होने हेतु आभार व्यक्त किया साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेई जी का भी स्वागत किया। डॉ. होता ने अपने स्वागत भाषण में कहा की यह फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के शिक्षकों एवं नवीन शोध छात्रों को रिसर्च पेपर लिखने के लिए नवीन तकनीकी से अवगत कराएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला माननीय कुलपति पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर ने कहा कि रिसर्च में अब इन्वेंशन एवं इनोवेशन पर जोर दिया जाना चाहिए । इनोवेशन पर आधारित रिसर्च की सार्थकता समाज के लिए होती है, एवं जब भी कोई शोधकर्ता राष्ट्र हित के लिए रिसर्च करता है, तो वह रिसर्च सर्व समाज के लिए उपयोगी होती है। साथ ही उन्होंने कहां की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी रिसर्च का बहुत बड़ा भाग होगा, जिससे स्नातक स्तर से ही छात्रों में इन्वेंशन एवं अविष्कार करने की सोच को विकसित किया जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेई जी ने कहा कि अब कोई भी जगह छोटी जगह नहीं रह गई है। कुछ नया खोजने की सोच तो व्यक्तित्व का हिस्सा होती है ऐसा व्यक्ति कहीं भी रिसर्च कर सकता है, एवं एक दिन में ऐसे व्यक्तित्व को विकसित नहीं किया जा सकता, ऐसा व्यक्तित्व विकसित करना एक तपस्या की तरह होता है, जो धीरे-धीरे ही विकसित होता है । इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के एवं दूसरे राज्यों के ६० से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया एवं उन्होंने भी इस कार्यक्रम में अपने अनुभवों को साझा किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न उत्कृष्ट विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की संयोजक डॉ रश्मि गुप्ता ने किया।

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