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कोरगुड़ा में कथित स्वास्थ्य शिविर को लेकर विवाद: ₹7.18 लाख की सामग्री जब्त

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बालोद/लोहारा। ग्राम कोरगुड़ा के पंचायत भवन में ‘रेट्रो ह्यूमेनकेयर’ संस्था द्वारा आयोजित बताए जा रहे स्वास्थ्य शिविर को लेकर शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार शिविर स्थल से बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की गई है और संबंधित संस्था के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के अलग-अलग बयानों के बाद शिविर के आयोजन, अनुमति और उत्पादों की बिक्री को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।

 

पुलिस ने 36 मदों की सामग्री की जब्त

 

पुलिस की जब्ती सूची के अनुसार, शिविर स्थल से कुल 36 मदों की सामग्री जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹7.18 लाख बताई गई है।

 

जब्त सामग्री में मारुति ईको वाहन क्रमांक CG 07 AQ 7352, क्वांटम रेजोनेंस मैग्नेटिक एनालाइजर मशीन, सैमसंग लैपटॉप, कैनन प्रिंटर, वजन मशीन, एक्सटेंशन बोर्ड, केबल तथा आयुर्वेदिक एवं फूड सप्लीमेंट्स से संबंधित उत्पाद शामिल बताए गए हैं।

 

पुलिस के अनुसार जब्ती गवाहों की मौजूदगी में की गई है तथा जब्त सामग्री को कोतवाली थाने में रखा गया है।

 

SDOP ने कहा—थाने को नहीं दी गई थी सूचना

 

SDOP विनय कुमार के अनुसार, पुलिस को प्रेस रिपोर्टर क्लब की ओर से जानकारी मिली थी कि रेट्रो ह्यूमेनकेयर संस्था द्वारा ग्राम कोरगुड़ा के पंचायत भवन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया है।

 

उनके अनुसार संस्था की ओर से संबंधित थाने को शिविर के आयोजन की सूचना नहीं दी गई थी। शिविर में रखी दवाओं एवं अन्य उत्पादों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी पुलिस के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके। पंचायत भवन में शिविर लगाने की अनुमति से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात SDOP ने कही है।

 

थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा बोले—यह जागरूकता का विषय, प्रत्येक नागरिक को रहना होगा सजग

 

कोतवाली थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा ने कहा कि यह जागरूकता का विषय है और प्रत्येक नागरिक को इस तरह के मामलों को लेकर सजग रहना होगा।

 

उन्होंने बताया कि फिलहाल प्राप्त शिकायत के आधार पर उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में BNSS की धारा 106 के तहत सामग्री की जब्ती की कार्रवाई की गई है।

 

थाना प्रभारी ने बताया कि रेट्रो ह्यूमेनकेयर संस्था के प्रमुख के. रत्नम, निवासी तालपुरी कॉलोनी, भिलाई को संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है तथा जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

स्वास्थ्य विभाग ने भी अनुमति की जानकारी से किया इंकार

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उइके ने फोन पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे किसी शिविर की अनुमति दिए जाने अथवा विभाग को इसकी जानकारी होने की बात उनके संज्ञान में नहीं है।

 

इस बयान के बाद शिविर में स्वास्थ्य विभाग की अनुमति अथवा आधिकारिक सहभागिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

पंचायत ने कहा—न सूचना दी, न अनुमति ली

 

ग्राम पंचायत कोरगुड़ा के उपसरपंच विजय कुमार यादव ने कहा कि पंचायत को शिविर की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और न ही पंचायत भवन में शिविर लगाने के लिए पंचायत से आवेदन अथवा अनुमति ली गई थी।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजकों द्वारा पंचायत भवन खोलकर शिविर लगाया गया तथा भवन की बिजली आदि का भी उपयोग किया गया।

 

विधायक के नाम का उल्लेख किए जाने के संबंध में उपसरपंच ने कहा कि न विधायक की ओर से, न उनके पीए की ओर से और न किसी अन्य माध्यम से पंचायत से इस शिविर के संबंध में संपर्क किया गया था।

 

यह पंचायत प्रतिनिधि का बयान है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए पंचायत के रिकॉर्ड, आवेदन रजिस्टर और अन्य दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

 

विधायक की तस्वीर वाला बैनर और सहमति का दावा

 

शिविर स्थल पर स्थानीय विधायक की तस्वीर वाला बैनर लगाए जाने की बात सामने आई है। संस्था से जुड़े लोगों द्वारा विधायक की सहमति होने का उल्लेख किए जाने की बात भी ग्रामीणों और मौके से जुड़ी जानकारी में सामने आई है।

 

हालांकि, विधायक की सहमति या अनुमति का कोई लिखित दस्तावेज सामने आया है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

 

इसलिए इस बिंदु को फिलहाल सहमति के दावे और जांच के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। केवल बैनर पर तस्वीर होने अथवा किसी व्यक्ति द्वारा सहमति का उल्लेख किए जाने से अनुमति प्रमाणित नहीं होती।

 

प्रेस रिपोर्टर क्लब की शिकायत में क्या आरोप?

 

प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारी देकर फूड सप्लीमेंट्स को कई बीमारियों की दवा अथवा उपचार के रूप में बताया गया और उनसे अधिक राशि ली गई।

 

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल, बिल/रसीद, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

 

ग्रामीण हिना देवांगन का दावा—₹2,400 लिए गए

 

ग्राम कोरगुड़ा निवासी हिना देवांगन ने अपने बयान में दावा किया कि वह सिर घूमने, चक्कर और कमजोरी की समस्या के कारण शिविर में पहुंचीं।

 

उनके अनुसार उन्हें मस्तिष्क से संबंधित दवा, मालिश के लिए तेल/दवा और पेट साफ करने की दवा दी गई तथा इसके लिए उनसे ₹2,400 लिए गए।

 

हिना देवांगन का यह भी कहना है कि उन्हें दिए गए उत्पादों को ‘दवा’ बताया गया था, फूड सप्लीमेंट के रूप में नहीं।

 

यह हिना देवांगन का बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

 

‘हैदराबाद से बड़े डॉक्टर’ आने का प्रचार और ₹100 में जांच का दावा

 

अन्य ग्रामीणों के संयुक्त बयान के अनुसार गांव में प्रचार एवं अनाउंसमेंट के माध्यम से बताया गया था कि हैदराबाद से बड़े डॉक्टर शिविर में आने वाले हैं।

 

ग्रामीणों का दावा है कि फिंगरप्रिंट के माध्यम से जांच किए जाने और बाहर कथित तौर पर ₹8,000 से ₹10,000 तक खर्च होने वाली जांच को यहां ₹100 में किए जाने की जानकारी दी गई थी।

 

ग्रामीणों के अनुसार ₹100 की पंजीयन/जांच राशि के बाद अलग-अलग लोगों से ₹300 से लेकर ₹2,000-₹2,400 तक दवा अथवा अन्य उत्पादों के नाम पर राशि ली गई।

 

ये सभी बातें फिलहाल ग्रामीणों के बयान और दावे हैं। इनकी पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से होना बाकी है।

 

राधेलाल देवांगन बोले—जानकारी पर भरोसा कर पहुंचे

 

ग्रामीण राधेलाल देवांगन के अनुसार उन्हें किसी पहचान अथवा माध्यम से बड़े डॉक्टरों के गांव में आने की जानकारी मिली थी। इसी विश्वास के कारण उन्होंने और अन्य ग्रामीणों ने शिविर में पहुंचकर अपनी जांच कराई।

 

तोमन साहू ने कहा—ग्रामीण स्वास्थ्य से खिलवाड़ प्रमाणित हुआ तो कार्रवाई हो

 

छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसायटी के चेयरमैन एवं बालोद जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू ने कहा कि उन्हें प्रेस रिपोर्टर क्लब के माध्यम से ग्रामीणों को कथित रूप से भ्रामक स्वास्थ्य जानकारी देकर फूड सप्लीमेंट्स बेचने की जानकारी मिली।

 

उन्होंने कहा कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन अथवा ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ प्रमाणित होता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार संबंधी सेवाओं को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। ऐसे मामलों में यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका जांच में सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

 

स्थानीय विधायक की अनुमति की चर्चा पर उन्होंने इसे जांच का विषय बताते हुए कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के संबंध में इस तरह की बात सामने आना गंभीर विषय है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ की ओर से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

 

क्या तथ्य हैं और क्या जांच का विषय?

 

बिंदु| वर्तमान स्थिति

कोरगुड़ा में शिविर लगाया गया| पुलिस कार्रवाई और उपलब्ध जानकारी से सामने आया

36 मदों की सामग्री जब्त| पुलिस जब्ती सूची के अनुसार

जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत ₹7.18 लाख| पुलिस जब्ती सूची के अनुसार

थाने को शिविर की सूचना| SDOP के अनुसार सूचना नहीं दी गई

स्वास्थ्य विभाग की अनुमति| CMHO के अनुसार ऐसी अनुमति/जानकारी से इंकार

पंचायत की अनुमति| उपसरपंच के अनुसार अनुमति नहीं ली गई

₹100 में जांच का प्रचार| ग्रामीणों का दावा

₹300 से ₹2,400 तक राशि लेने का दावा| ग्रामीणों के बयान

हिना देवांगन से ₹2,400 लिए गए| हिना देवांगन का बयान; स्वतंत्र पुष्टि बाकी

उत्पादों को ‘दवा’ बताकर देने का आरोप| शिकायत/ग्रामीणों का दावा; जांच बाकी

विधायक की सहमति| संस्था से जुड़े लोगों द्वारा कथित उल्लेख; लिखित प्रमाण की पुष्टि बाकी

विधायक की तस्वीर वाला बैनर| मौके से संबंधित जानकारी के अनुसार; अनुमति का आधार जांच का विषय

उत्पाद दवा थे या फूड सप्लीमेंट| जांच के बाद स्पष्ट होगा

कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं| जांच पूरी होने के बाद निर्धारित होगा

 

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

 

मामले में फिलहाल प्रमुख तथ्य यह है कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर सामग्री जब्त कर जांच शुरू कर दी है, जबकि शिविर की अनुमति, स्वास्थ्य विभाग को सूचना, पंचायत भवन के उपयोग, उत्पादों की प्रकृति, ग्रामीणों से ली गई राशि और स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं।

 

अब जांच में जब्त सामग्री, उत्पादों की पैकेजिंग एवं लेबल, बिल-रसीद, भुगतान रिकॉर्ड, अनुमति संबंधी दस्तावेज, पंचायत के रिकॉर्ड तथा संस्था के प्रमुख के. रत्नम द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

 

जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोषी ठहराने के बजाय सामने आए बयानों और दस्तावेजों को जांचाधीन तथ्य एवं आरोप के रूप में प्रस्तुत करना उचित होगा।

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