West Bengal Election: नई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार दिया ।
सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि तृणमूल कांग्रेस की यह दलील कि केंद्र सरकार का कोई कर्मचारी अनिवार्य रूप से उनके खिलाफ ही जाएगा, गलत है। कोर्ट ने बताया कि यह गलती दरअसल इसी धारणा में है और इसके बजाय तृणमूल को सरकारी कर्मचारियों पर कुछ भरोसा करना चाहिए।
कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग द्वारा जारी एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा, “इसमें कहा गया है कि विभिन्न हलकों से विसंगति को लेकर आशंकाएं जताई गई हैं। वे केंद्र सरकार के एक और प्रतिनिधि की मांग कर रहे हैं। क्या यह राज्य पर उंगली नहीं उठा रहा है?”
जस्टिस बागची ने क्या कहा?
इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने जवाब दिया, “इससे शायद ही कोई फर्क पड़ता है कि वह केंद्र सरकार का नॉमिनी है या नहीं। यह चुनाव आयोग के अपने विवेक पर निर्भर करता है। आपके काउंटिंग एजेंट वहां मौजूद होंगे और दूसरे लोग भी होंगे। फिर काउंटिंग असिस्टेंट, काउंटिंग सुपरवाइजर और माइक्रो ऑब्जर्वर होंगे जो केंद्र सरकार के अधिकारी होते हैं।”
जस्टिस बागची ने कहा, “हम यह नहीं मान सकते कि यह अधिसूचना नियमों के विपरीत है, क्योंकि इनमें से एक तो केंद्र सरकार का अधिकारी है, लेकिन बाकी नहीं… पूरी तरह से एक ही समूह में से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता।”
क्या है मामला?
यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें कोर्ट ने टीएमसी की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोटों की गिनती के दौरान पर्यवेक्षकों के तौर पर केवल केंद्र सरकार और PSU (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) के कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती दी गई थी।

