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पंकज कुमार झा के पोस्ट से गरमाई सियासत: राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर तीखा हमला, कहा – राजनीति का कलंक

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रायपुर। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। फेसबुक यूजर पंकज कुमार झा द्वारा किए गए एक विस्तृत पोस्ट में कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं पर तीखी टिप्पणी की गई है, साथ ही देश की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पोस्ट में Pawan Khera, Supriya Shrinate, Alka Lamba और Rahul Gandhi का नाम लेते हुए उनके बयानों और आचरण की कड़ी आलोचना की गई है। लेखक ने आरोप लगाया है कि इस तरह के रवैये से भारतीय राजनीति की मर्यादा प्रभावित हो रही है।

उन्होंने लिखा कि Pawan Khera Supriya Shrinate Alka Lamba Rahul Gandhi ….. इन सबको और ऐसे लोगों को अगर भारतीय राजनीति का कलंक कहा जाय तो वह भी कम ही होगा। भारतीय राजनीति को इन असामाजिक तत्वों ने अंडरवर्ल्ड सरीखा बना कर रख दिया है।

एक से एक कूट रचना, अनेक तरह का षड्यंत्र, सड़क छाप बदजुबानी, असभ्यता, अशालीनता, बदतमीजी, बदजुबानी, देशद्रोह … कुल

मिला कर इन सभी में नीचे गिरने की प्रतिस्पर्धा सी चल पड़ी है। अभी इन मामलों में फिलहाल बाजी पवन खेड़ा ने मार ली है। कूट रचना करते रंगे ‘हाथ’ पकड़े जाने के बाद अभागे मारे-मारे फिर रहे हैं। निश्चित ही राजनीति और संविधान के हित में बड़ा कदम होगा अगर अनेक साजिशों के अपराधी इन तत्वों को न्यायिक प्रक्रिया द्वारा कड़ा से कड़ा दंड दिया जा सके। किंतु …

 

किंतु दुखद यह है कि हमारी न्याय प्रणाली भी बहुधा जनता की आशा पर तुषारापात कर देती है। याद कीजिए, यही पवन खेड़ा थे जिन्होंने विश्व के सबसे बड़े नेता, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के पूज्य पिता को लेकर अनर्गल टिप्पणी की थी और रायपुर में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए दिल्ली से जाते समय विमानतल पर गिरफ्तार किए गए थे। याद कर दुख होगा आपको कि सीधे सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को जमानत दे दिया था।

 

इससे पहले ऐसा कभी सुना है आपने कि सीधे सुप्रीम कोर्ट किसी आरोपी को जमानत देता हो? पवन खेड़ा को सीधे मिल गयी थी जमानत। मजे की बात यह कि ऐसा करते हुए टिप्पणी भी की कोर्ट ने कि ऐसी हरकत करेंगे वे तो हर बार रक्षा नहीं कर पायेगा कोर्ट उन्हें! सोचिए जरा। कोर्ट का काम क्या आरोपी की रक्षा करना होता है?

 

यह कुछ कुछ ऐसा हुआ जैसे हत्या के मुख्य अभियुक्त रहे तब के कांग्रेस नेता अमित जोगी को कोर्ट ने रिहा कर दिया था और शेष 28 अभियुक्तों को सजा दे दी थी। बाद में ऐसे रिहा करने वाले जज की एक सीडी भी आ गयी थी जो कथित तौर पर रिहाई का आदेश देने के लिए सौदा कर रहे थे। ऐसे कृत्य निस्संदेह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विश्वास को कमजोर करते हैं। हालांकि ऊपरी अदालत ने ही फिर से उस अभियुक्त को सजा देकर न्याय के प्रति भरोसे को दृढ़ किया है। बहरहाल!

 

कांग्रेस के ऐसे नेताओं को राजनीतिक-सामाजिक जीवन से बाहर करने की जरूरत है जो झूठ, फरेब आदि के सहारे लोकप्रिय नेताओं की चरित्र हत्या करता हो। कांग्रेस में मुट्ठी भर बच गए अच्छे नेताओं को चाहिए कि वे ऐसे गिरोहों से अलग होकर एक अच्छे और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए इनसे अलग हो जाय।

 

राजनीति को भरोसे और शालीनता का पर्याय बनाने के लिए आज के विपक्ष को काफी मेहनत करनी होगी। उसे यह मेहनत अपने घर की सफाई कर ही करना होगा।

 

गलत तो नहीं कहा न?

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