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बंगाल में  SIR टीम के 7 अधिकारी को बनाया बंधक, Supreme Court ने कहा – मनोबल गिराने की चाल

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गुस्साए लोगों ने सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक बंधक बना लिया। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए इसे बेहद निंदनीय बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना मालदा के कालियाचक इलाके में हुई, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारियों को दोपहर से लेकर देर रात तक रोके रखा गया। करीब रात 1 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी टीम मौके पर पहुंची और सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

कैसे हुआ पूरा मामला

बताया जा रहा है कि वोटर लिस्ट से कई लोगों के नाम हटाए जाने के बाद इलाके में भारी विरोध शुरू हो गया। इसी दौरान गुस्साए लोगों ने मौके पर मौजूद न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया और उन्हें जाने नहीं दिया। ये अधिकारी चुनाव से पहले मतदाता सूची के काम को समय पर पूरा करने में जुटे थे। बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, इसलिए यह प्रक्रिया तेजी से चल रही थी।

जब पुलिस अधिकारियों को निकालकर ले जा रही थी, तब प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहनों पर हमला करने की कोशिश की। कुछ वीडियो में गाड़ियों के शीशे टूटे हुए नजर आए और पत्थरबाजी भी हुई। हालांकि, पुलिस ने हालात को काबू में करते हुए सभी अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया।

चुनाव आयोग और नेताओं की प्रतिक्रिया

घटना के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस के महानिदेशक से पूरी रिपोर्ट मांगी है। वहीं, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि यह घटना सत्ताधारी पार्टी के भड़काऊ बयानों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, लेकिन इस तरह का विरोध केवल पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा कि उनकी पार्टी कानून को हाथ में लेने में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि इस घटना की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और पार्टी केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रही है।

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