CG High Court : बिलासपुर। फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी कर रहे एक शिक्षक की याचिका हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। शिक्षक ने राज्य शासन द्वारा किए गए बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति इस तरह की सेवा कानून की नजर में शून्य है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, धोखाधड़ी से हासिल किए गए नौकरी कानून की नजर में अक्षम्य अपराध है, ऐसे मामलों में विभागीय जांच के बिना भी सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया जा सकता है। कोंडागांव जिले में पदस्थ एक शिक्षक ने अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
शिक्षक ने अपनी याचिका में कहा, बिना उचित जांच के उसे नौकरी से हटाया गया है, जो गलत है। मामले की सुनवाई के दोरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा, कि, यदि नियुक्ति ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है, तो वह प्रारंभ से ही अमान्य मानी जाएगी। पंडित रविशंकर शुक्ल विवि रायपुर ने याचिकाकर्ता शिक्षक द्वारा प्रस्तुत मार्कशीट को फर्जी घोषित किया था।
सरकार का फैसला सही
याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, कि ऐसे मामलों में विस्तृत विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, जब कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी हासिल करता है, तो वह सेवा का हकदार नहीं होता और उसकी नियुक्ति स्वतः ही शून्य हो जाती है।

