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Air Pollution और बिगड़ती लाइफस्टाइल से बढ़ रहीं फेफड़ों व नींद की बीमारियां, रायपुर में यशोदा हॉस्पिटल के विशेषज्ञ की अहम जानकारी

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रायपुर। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद एक सुपर मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल है, जिसकी शाखाएँ सोमाजीगुड़ा, सिकंदराबाद, मल्कपेट और हाईटेक सिटी में स्थित हैं। यहाँ 4000+ बेड और 700+ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मरीजों को उन्नत चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रही है। यशोदा हॉस्पिटल्स में फेफड़े प्रत्यारोपण (Lung Transplant), लिवर ट्रांसप्लांट, हार्ट ट्रांसप्लांट, मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, कैंसर, कार्डियक और अन्य जटिल बीमारियों के लिए अत्याधुनिक उपचार सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

इसी क्रम में रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के वरिष्ठ कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमणियन ने फेफड़ों की बीमारियों और स्लीप डिसऑर्डर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

उन्होंने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण, बदलती जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या के कारण सांस से जुड़ी समस्याएं और नींद से संबंधित बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का संक्रमण और स्लीप एपनिया जैसी बीमारियां आज के समय में आम होती जा रही हैं। यदि इन रोगों की समय पर पहचान कर उचित उपचार किया जाए तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

डॉ. विश्वेश्वरन ने बताया कि कई लोग नींद से जुड़ी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकती है। उन्होंने कहा कि इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जटिल फेफड़ों की बीमारियों का उपचार अब अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संभव हो गया है। ब्रोंकोस्कोपी सहित अन्य उन्नत प्रक्रियाओं की मदद से फेफड़ों से संबंधित रोगों की सटीक जांच और उपचार किया जा रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

उन्होंने आगे बताया कि गंभीर और अंतिम चरण की फेफड़ों की बीमारियों के कुछ मामलों में लंग ट्रांसप्लांट जीवन बचाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। इसके अलावा अत्यंत गंभीर स्थिति में मरीजों को सहारा देने के लिए ECMO (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन) जैसी उन्नत जीवन रक्षक तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह मशीन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे फेफड़ों को आराम मिलता है और मरीज के जीवन को बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने फेफड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, स्वच्छ वातावरण और धूम्रपान से दूरी बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, तेज खर्राटे या नींद में बार-बार रुकावट जैसी समस्याएं दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें।

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