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‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी पर राहुल गांधी को झटका या राहत? बॉम्बे HC ने फैसला रखा सुरक्षित

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मुंबई/नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी को लेकर दायर आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।

यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, सितंबर 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहा था और 24 सितंबर 2018 को इसी आशय का ट्वीट भी किया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस बयान से प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा।

2019 में दायर हुई थी शिकायत

यह आपराधिक मानहानि की शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में गिरगांव स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर की थी। मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था।

याचिका में क्या मांग?

राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस मानहानि केस को रद्द करने की मांग की है। उनका पक्ष है कि राजनीतिक भाषण के दौरान की गई टिप्पणी को आपराधिक मानहानि का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर फैसले पर

हाई कोर्ट द्वारा आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सबकी निगाहें फैसले पर टिकी हैं। यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और मानहानि कानून के दायरे को लेकर एक अहम उदाहरण माना जा रहा है। फैसला आने के बाद ही तय होगा कि राहुल गांधी को इस मामले में आगे ट्रायल का सामना करना पड़ेगा या उन्हें राहत मिलेगी।

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