रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल की याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल को ईओडब्ल्यू की एफआईआर के मामले में नई याचिका दायर करने की छूट दी है।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि वे चाहें तो फिर से याचिका दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली बार याचिका केवल चैतन्य बघेल की ओर से होनी चाहिए, किसी और की नहीं।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच में चैतन्य बघेल की तरफ से पक्ष रखा गया। चैतन्य ने ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को गलत बताया है। इसमें उन्होंने कहा कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
इस दौरान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए तर्क रखा। वहीं, सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन और हर्षवर्धन परगनिया ने चैतन्य बघेल की ओर से पैरवी की।
सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती दी है। बता दें कि चैतन्य बघेल को श्वष्ठ ने बीते 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था। वे 39 दिनों से जेल में बंद है।