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गणेश नगर अन्नपूर्णा कॉलोनी में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, नागरिकों में आक्रोश

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गणेश नगर अन्नपूर्णा कॉलोनी में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त, नागरिकों में आक्रोश

नाला निर्माण अधूरा, पानी घरों तक घुसा, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, नगर निगम बेपरवाह

बिलासपुर। बरसात ने नगर निगम की पोल खोल दी है। शहर के गणेश नगर वार्ड क्रमांक 46 अंतर्गत अन्नपूर्णा कॉलोनी सेक्टर-1 में बारिश के पानी ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के चलते सड़कें ही नहीं, घरों तक में पानी घुस चुका है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमारजन सबसे ज्यादा परेशान हैं। कॉलोनीवासी कई बार पार्षद और नगर निगम से शिकायत कर चुके हैं, परंतु समाधान अब तक नहीं निकला।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है, परंतु नगर निगम द्वारा कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। बारिश का पानी सड़कों से होते हुए लोगों के घरों में घुस जाता है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है और लोग काम पर नहीं जा पा रहे हैं।

वन विभाग से सटे इलाके में बनी जलभराव की स्थिति

गणेश नगर का यह क्षेत्र वन विभाग की जमीन से सटा हुआ है, जो ऊंचाई पर स्थित है। जबकि अन्नपूर्णा कॉलोनी अपेक्षाकृत निचले हिस्से में है। ऐसे में जलप्रवाह सीधे इसी इलाके की ओर होता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि राम मंदिर से शासकीय प्राथमिक शाला तक नाले का निर्माण प्रस्तावित था, परंतु ठेकेदार द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि अधूरा नाला पानी की निकासी नहीं कर पा रहा है, जिससे कॉलोनी तालाब में तब्दील हो गई है।

अधूरा निर्माण और अनदेखी बनी मुसीबत की वजह

गौरतलब है कि यह वार्ड शहर की महापौर के वार्ड से लगा हुआ है, इसके बावजूद अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया है। वार्डवासी नगर निगम की अनदेखी से आक्रोशित हैं। बताया जा रहा है कि अधूरे नाला निर्माण कार्य का निरीक्षण खुद महापौर, जोन कमिश्नर और इंजीनियरों द्वारा किया गया था, लेकिन उसके बाद भी काम रुका हुआ है।

पार्षद का बयान

वार्ड पार्षद इब्राहिम अब्दुल खान ने बताया कि उन्होंने कई बार निगम अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही है। जलभराव की समस्या गंभीर है और इसके निराकरण के लिए तत्काल कार्यवाही की जरूरत है।

निवासियों की मांग

रहवासियों ने मांग की है कि अधूरे नाले का कार्य तुरंत पूर्ण किया जाए और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि हर साल उन्हें इस परेशानी से दो-चार न होना पड़े। वरना वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

 

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