मैनपुर

माता पहुँचानी माता शीतला पूजा पर मां शीतला से आशीर्वाद लेने उमड़े लोग, गांवों में दिनभर मेले जैसा माहौल

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माता पहुँचानी माता शीतला पूजा पर मां शीतला से आशीर्वाद लेने उमड़े लोग, गांवों में दिनभर मेले जैसा माहौल

पुलस्त शर्मा मैनपुर – तहसील मुख्यालय मैनपुर सहित आसपास के अचंलो में मंगलवार को ग्राम की देवी शीतला से परिवार की खुशहाली, निरोगी काया का आशीर्वाद लेने बड़ी संख्या में लोग माता शीतला मंदिर पहुंचते रहे। माता पहुंचानी शीतला पूजा के अवसर पर श्रध्दालुओं का हुजुम उमड़ने से शीतला मंदिर मार्ग पर मेले सा माहौल रहा लोगो द्वारा घर से लाए अन्न, मिष्ठान, फल, आभूषण भेंट किया। इस दौरान मंदिर समिति की ओर से हल्दीयुक्त पानी से नीम के पत्ते द्वारा आशीष दिया गया साथ ही श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। मैनपुर, हरदीभाठा, भाठीगढ़, गोपालपुर, मैनपुरकला, जाड़ापदर, जिड़ार, कोनारी, शोभा गोना, गौरगाँव, कोचेंगा क्षेत्र मे बड़ी धूमधाम से मनाया गया। माता पहुंँचानी के अवसर पर मां शीतला मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह छह बजे जल अभिषेक कर, श्रृंगार से सजा कर माता पहुंँचानी का पर्व परंपरा अनुसार मनाया गया। जिससे शीतला मंदिर परिसर में मेले जैसा आकर्षक माहौल रहा। गांव के सभी लोगों ने शीतला मंदिरों में पहुंचकर मां शीतला की पूजा अर्चना कर क्षेत्र में सुख शांति समृद्धि तथा निरोग रहने व फसलों को कीट व्याधि से बचाने की कामना भी की गई। दोपहर तीन बजे ठंडई छिड़काव शुरू किया गया। वर्षों पुरानी परंपरा है कि माता पहुंँचानी के दिन भक्त शीतला मंदिर पहुंँचकर छोटी माता, गलवा माता और बड़ी माता जैसे संक्रमित रोगों से निजात पाने के साथ ही सुख समृद्धि का मनोकामना लेकर यहां पूजा-अर्चना करते है। बच्चों को गर्मी के प्रकोप से होने वाली बीमारियों से बचाने और माता जैसे संक्रमण के मुक्ति के लिए दूध, नीबू, नीम के पत्ते से बनाई गई ठंडाई माता के आशीर्वाद के रूप में भक्तों पर छिड़काव किया गया और पूजा अर्चना कर सैकड़ो भक्त ने आशीष ली। मान्यता है कि माता की पूजन करने वाले बच्चों को चेचक आदि बीमारियां नहीं होती हैं। जिससे रोग दूर भागते हैं। इसे फसलों पर छिड़कने से माता की कृपा से फसलों में घातक कीट व्याधियों का प्रकोप कम हो जाता है। यहां भक्तों द्वारा चावल, चना दाल, हल्दी, मिर्ची, नीम पत्ता, फूल, नारियल आदि चढ़ाया गया। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, पुरुष बड़ चढ़कर शामिल हुए। परिजन के सुख शांति तंदूरुस्ती के लिए मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान श्रद्धालुओं को ठंडई सहित प्रसाद वितरण किया कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शीतला समिति का भरपूर योगदान रहा।
दिनभर हुआ लाई चिला रोटी का वितरण
मंदिर समिति के ओर से श्रद्धालुओं के लिए लाई चिला रोटी प्रसाद का वितरण किया गया। सुबह से प्रसाद का वितरण देर शाम तक होता रहा। लोग दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण करते रहे। आषाढ़ माह में सोमवार,गुरुवार और मंगलवार को होता है माता पहुंँचानी का आयोजन छत्तीसगढ़ की लोक, कला, संस्कृति, पर्व, महोत्सव में माता पहुंँचानी का विशेष महत्व है। पुरातन कॉल से यह पंरपरा चली आ रही है। देवी आराधना के लिए गुरूवार का दिन शुभ माना जाता है। गुरुवार के अलावा सोमवार मंगलवार को भी माता शीतला का वार माना जाता है। इसीलिए आषाढ़ माह में सोमवार, मंगलवार या गुरूवार को एक दिन निर्धारित कर गांव-गांव में माता पहुंँचानी का आयोजन ग्रामीण जन करते हैं। आयोजन की मुनादी पहले से ही कर दी जाती है। जिससे लोगों को गांव के आयोजन की पूर्व सूचना होती है। लोग अपने परिवार के साथ माता शीतला का दर्शन करने पहुंँचते हैं। यहां लोगों पर हल्दी युक्त पानी की बूदें नीम के पत्ते से छिड़का जाता है। इसे ठंडई लेना कहते हैं। ठंडई लेने पहुंँचे लोग माता के दरबार में यथा संभव अन्न, फल, आभूषण, पुष्प, द्रव्य अर्पित करते हैं। इस संबंध में लोगों का कहना है कि स्वस्थ्य निरोगी काया और घर-परिवार की खुशहाली के लिए सालभर में यह एक अवसर आता है, जब लोग मां शीतला से आशीर्वाद लेते हैं।

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