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बेटा-बहु व नाती-पोतो को आर्शिवाद देने अमेरिका पहुंचे बिलासपुर प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य मोहन मदवानी 

बेटा-बहु व नाती-पोतो को आर्शिवाद देने अमेरिका पहुंचे बिलासपुर प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य मोहन मदवानी 

बिलासपुर/ बिलासपुर प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य श्री मोहन मदवानी इन दिनों अमेरिका के मलिसा शहर में हैं। वे अपने बेटा-बहु व नाती पोतों से मिलने गये हैं। आज के भाग दौड़ के जीवन में कामयाबी पाना मुसकिल सा हो गया है और यह भी सत्य है कि कभी-कभी रोटी के लिए मिट्टी से अलग होना पड़ता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरा करने के बाद शहर के वरिष्ठ पत्रकार का बेटा सुशील मदवानी अमेरिका में जॉब कर रहा है। बेटे के घर अगर बच्चा पैदा होता है तो दादा-दादी का होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन बेटे का घर सात समंदर पार विदेशी धरती में हो तो उससे मिलना मुश्किल हो जाता है। श्री मोहन मदवानी अपनी पत्नी के संग पूरे छह माह के लिए अमेरिका गए हुए हैं।

श्री मोहन मदवानी ने बताया कि वे मलिसा शहर में हैं। यहां का वातावरण प्रदूषण मुक्त है। बार- बार मौसम में बदलावा होने के कारण यहां के अधिकांश घर लकड़ी से बनाये गये हैं। साग-सब्जी के अलावा बर्तन धोने के लिए भी लोग मशीन का इस्तेमाल करते हैं। सड़क चमकदार के साथ साथ सुगम यातायात की व्यवस्था हैं। वाहनों के रफ्तार पर नियंत्रण व सड़कों को मवेशी मुक्त रखा गया हैं। लोगों को परेशानी न हो इसके लिए अनगिनत फ्लाईओवर बनाये गये हैं। अमेरिका की धरती में भारतीय लोगों का बहुत मान सम्मान हैं। यहां युलेस सेक्शनगत सीख संगत गुरुद्वारा है। जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में भारतीय लोग अरदास के लिए पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के कारण बरसात, ठंडी, गर्मी का मौसम रहता है। मनोरंजन, आस्था व सैर सपाटे के लिए बहुत ही शानदार है। घर परिवार का सारा काम किसी पर आश्रित नहीं रहता लगभग सारा काम आटोमैटिक मशीनों से ही होता है। मूलत: सिंधी कालोनी बिलासपुर में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहन मदवानी ने शहर के पत्रकारों के लिए सीख गुरद्वार में अरदास कर मंगलमय जीवन की कामना की है।

वर्ष 2019 में मिला मौका

वरिष्ठ पत्रकार श्री मोहन मदवानी के पुत्र सुशील मदवानी ने बताया कि मैने एनआईटी दुर्गापुर में की है। यूएस में इक्विनिश डेटा सेंटर कंपनी में जॉब करने का मौका मिला तो मैं अपनी पत्नी पूनम मदवानी के साथ वर्ष 2019 में आकर काम कर रहा हूं। अपनों की याद आती है लेकिन कभी -कभी रोटी के लिए मिट्टी से अलग होना पड़ता है। बिलासपुर मेरा जन्म भूमि है और मुझे अपने शहर पर नाज है।

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