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सागौन की लकड़ी के साथ पकड़े गए पिकअप की आखिर क्या है कहानी?

बालोद।(स्वाधीन जैन) बालोद वन विभाग के भरोसे वन्यप्राणी एवं वन सुरक्षित नहीं है यह साबित होता हुआ नजर आ रहा है। ताजा मामला डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र के हितापठार जंगल से सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे हुए जब्त किए गए पिकअप वाहन से जुड़ा हुआ है। जिसमें राजसात की कार्यवाही करने की बजाए पिकअप वाहन को बाकायदा छोड़ दिया गया। मामला छत्तीसगढ़ वाच समाचार पत्र के संज्ञान में पहुंच चुका है, हरकत में आए वनकर्मी मामले को दबाने में लगे हुए हैं। गौरतलब हो कि कुछ लोगों ने इसकी जानकारी वन विभाग के आला अफसरों को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश सिन्हा ने मामले की शिकायत पीसीसीएफ, सीसीएफ दुर्ग वृत व बालोद डीएफओ से की है। डीएफओ ने जांच करने के निर्देश दिए है। आरोप है कि जंगल में इन दिनों जोर-शोर से अवैध कटान चल रहा है। प्रतिबंधित सागौन जंगल से अवैध कटान कर निकाली जा रही है। विभागों की साठगांठ होने से मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। चर्चा है कि वनकर्मियों की मिलीभगत से ही जंगल में पेड़ काटा गया है।

मामला डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र का ●

मार्च माह में डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र के हितापठार से सागौन लकड़ी का अवैध परिवहन करते वाहन पिकप CG08 AC 4234 को वनपाल छोटेलाल शर्मा द्वारा पकड़ा गया। सागौन लकड़ी से भरे इस वाहन को पकड़ने के बाद दो माह तक मंगचुआ डिपो में खड़ा रखा गया। आरोप है कि इसके बाद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र के रेंजर नंद कुमार सिन्हा ने पिकअप वाहन को बिना किसी कार्रवाई छोड़ दिया। नियमानुसार इस पर वन अधिनियम के तहत वन अपराध यानी एफआईआर दर्ज होना था। लेकिन इस रैकेट को कानून के हवाले करने की जगह कथित तौर पर लेनदेन करते हुए रेंजर नंद कुमार सिन्हा ने छोड़ दिया।

अफसरों का संरक्षण इसलिए लकड़ी माफिया सक्रिय

वन विभाग की कार्यवाही जो पिकअप वाहन को जब्त करने से जुड़ी हुई थी। जप्ती के बाद बाकायदा वाहन को दो माह तक मंगचुआ डिपो में खड़ा रखा गया। जिसमें स्पष्ट था कि सागौन पेड़ों की कटाई कर उसे पिकअप से ले जाया जा रहा था और उसी समय उसकी जब्ती हुई थी। लेकिन जिस वाहन में लकड़ियां थी उस वाहन को छोड़ दिया गया था। यह जानकारी भी सामने आ रही है कि वन विभाग के ही कुछ कर्मचारी लकड़ियों का अवैध कारोबार करने वालों को संरक्षण दे रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन सब के पीछे बड़ा हाथ अफसर का है।

मामले में वन विभाग बालोद की भूमिका संदिग्ध

आखिर वन विभाग क्यों सबकी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है जबकि पिकअप सागौन पेड़ो से लदा हुआ पकड़ा गया था। पूरे मामले में वन विभाग बालोद की भूमिका संदिग्ध है और यह सवाल उठता है कि क्या पहले कार्यवाही दिखाने का प्रयास किया और बाद में लेनदेन कर छोड़ दिया गया। वन विभाग की पिकअप छोड़ने को लेकर बनाई गई कहानी खुद ही कहानी को झूठी बता रही है और यह साबित हो रहा है कि वन विभाग बालोद सभी के आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है।

संरक्षित श्रेणी का वृक्ष है सागौन

सागौन संरक्षित श्रेणी का वृक्ष है और इसकी अवैध रूप से कटाई और इसका परिवहन दण्डनीय अपराध है और इसमें लिप्त वाहन के राजसात किये जाने का प्रावधान वन अधिनियम अनुसार है। लेकिन पकड़े गए सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे पिकअप को वन विभाग ने जिस तरह छोड़ दिया उससे जाहिर है कि मामले में बड़े स्तर का लेनदेन जरूर हुआ है और डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र की इस कार्यवाही से यह भी तय हो गया कि वन विभाग पेड़ों को जंगलों को और जंगली जानवरों को बचाने की अपनी मुख्य भूमिका निभाने की बजाए इन मामलों के तस्करों को बचाने की भूमिका का निर्वहन कर रही है और अब बालोद वन विभाग के हाथों वन्यप्राणी और वन सुरक्षित नहीं है।

अफसरों को फोन उठाने की फुर्सत नहीं

हरियाली का प्रतीक कहे जाने वाले जंगलों से धीरे-धीरे हरियाली छिन रही है। क्षेत्र में फैली वन संपदा का भरपूर मात्रा में दोहन किया जा रहा है। जिससे सरकार को तो राजस्व की हानि हो रही है। वहीं वन संपदा भी नष्ट होती जा रही है। वन विभाग के चेक पोस्टों को शो-पीस साबित कर सागौन माफिया हरियाली को नष्ट कर इमारती लकड़ी का अवैध परिवहन कर रहे हैं। लकड़ी चोरों के लालच और वन विभाग की लचरता के कारण सघन जंगल मैदान बनते जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि लकड़ी और गाड़ी को पकडऩे में तो यदाकदा वन विभाग सफल हो जाता है, लेकिन चोर हमेशा गिरफ्त से बाहर ही रहते हैं। स्थिति यह है कि ताजा मामले में उच्चस्तर तक शिकायत भी हो चुकी है, लेकिन वन विभाग के अफसरों को फोन उठाने तक की फुर्सत नहीं है।

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