रायपुर वॉच

तिरछी नजर : नो बाल पर आउट हुए सिंहदेव

आखिरकार बाबा की नाराजगी सामने आ गई । ढाई- ढाई साल सीएम पद का कथित फार्मूला लागू न होने से वो नाराज तो थे लेकिन पंचायत विभाग से अलग होने का तात्कालिक कारण भी था ।
बाबा निकाले गए 21 सहायक परियोजना अधिकारियों को पुनर्नियुक्ति देने के फैसले के विरोध में थे । बाबा इन संविदा सहायक परियोजना अधिकारियों को हाल के मनरेगा रोजगार सहायकों के हड़ताल के लिए काफी हद तक जिम्मेदार रहे थे लेकिन सीएम ने इसकी जानकारी बुलाई, तो पाया कि परियोजना अधिकारियों का हड़ताल से कोई लेना देना नहीं था ।
ऐसे में उन्हें बहाल किया जाना था ।
बाबा ने पीएम आवास योजना क्रियान्वयन नहीं होने की भी बात कही है । ये सही भी है लेकिन विधानसभा में उन्होंने खुद इसके क्रियान्वयन का तरीका बताया था कि कैसे लोन लेकर सरकार योजना पर आगे बढ़ रही है । ऐसे में इन कारणों को गिनाकर उनका विभाग छोड़ना गैर वाजिब प्रतीत होता है ।

मूणत ने मांगी माफी

एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के यहां कार्यक्रम में महिला पदाधिकारियों को बदसलूकी का शिकार होना पड़ा। बताते हैं कि मुर्मू से होटल में मिलने आई महिला पदाधिकारियों को देखकर पूर्व मंत्री राजेश मूणत भडक़ गए। उन्होंने पूछ लिया कि उन्हें यहां आने के लिए किसने आमंत्रित किया है? महिला पदाधिकारियों ने भी इसका तीखा प्रतिवाद किया। एक ने तो यहां तक कह दिया कि गाली देना हमें भी आता है। महिला पदाधिकारियों के तेवर देखकर मूणत शांत हो गए और फिर माफी मांगकर किसी तरह मामले को शांत किया।


शहर को हरा भरा करने का खेल 

 

नगर निगम एक बार फिर शहर को हरा भरा करने के लिए पौधा रोपण अभियान शुरू कर रहा है। बताते हैं कि पिछले वर्षों में भी इसी तरह का अभियान निगम ने चलाया था। सरकारी रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि पौधा रोपण के नाम पर स्मार्ट सिटी के मद से 2 साल में 7 करोड़ रुपये फूंक दिए गए। बताते हैं कि कुछ भाजपा नेताओं ने मामले को उठाने की कोशिश भी की थी, लेकिन बाद में वे खामोश हो गए। अब यह जानकारी सामने आ रही है कि पौधों की सप्लाई जिसने की थी वह भाजपा के बड़े नेताओं का करीबी माना जाता है। इस वजह से सब खामोश हो गए। यह एक ऐसा अभियान है जिसमें कांग्रेस और भाजपा नेताओं की बराबर की भागीदारी रही है।

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रूतबा कम हो गया

राजधानी रायपुर से सटे इलाकों में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंप खुल गए हैं। रायपुर-बिलासपुर रोड पर गाडिय़ों की आवाजाही खूब रहती है। बिजनेस भी अच्छा खासा रहता है। अब यहां प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। चूंकि सारे पेट्रोल पंप प्रभावशाली लोगों के है। इसलिए उनमें आपसी खींचतान भी हो रही है।

बताते हैं कि एक भाजपा नेता का रायपुर की सीमा से सटे गांव में पेट्रोल पंप पहले से ही ठीक ठाक चल रहा था। उसके बगल में ही एक दूसरी कंपनी ने एक कारोबारी को पेट्रोल पंप आबंटित कर दिया। भाजपा नेता ने इस पर आपत्ति भी लगाई, लेकिन एक प्रशासनिक प्रमुख विवाद में कूद पड़े। प्रशासनिक अफसर की कारोबारी से अच्छे संबंध है। और इस वजह से सारी अड़चनें दूर हो गई। अब सरकार नहीं है। इसलिए भाजपा नेता चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए।

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कवासी का दर्द 

उद्योग मंत्री कवासी लखमा अशिक्षित जरूर है, लेकिन वो काफी समझदार है। उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा-पूरा ज्ञान है। उन्होंने पार्टी नेताओं को बताया कि बस्तर में मोदी सरकार के आने के बाद एक भी नई सडक़ नहीं बनी है, जो भी काम चल रहे हैं वो मनमोहन सिंह सरकार के समय की स्वीकृत की हुई है। मगर दिक्कत यह है कि कोई भी इस विषय को प्रमुखता से नहीं उठा रहा है।

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