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जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ने गत दिनों मनाया लाल सलामी दिवस

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ईमरान/मुस्ताक दल्लीराजहरा:- 03 जून को शाम 06 बजे जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के कृषि कार्यालय पर जन मुक्ती मोर्चा के सैकड़ों मजदूर साथी एकत्रित होकर एक साथ झुंड के रूप में इंकलाब जिंदाबाद… 2-3 जून वीर शहीदों को लाल सलाम… नारा लगाते हुए शहीद स्मारक शहीद चौक पहुचे जंहा पर सभी 11 शहीद साथियो के साथ शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी जी के स्मारक पर गुलाल व पुष्पमाल्य अर्पण कर श्रधांजलि दिया गया और नवा बिहान के साथी कॉमरेड चन्द्रशेखर यादव एवं साथियो के द्वारा जन गीत गाया गया और मुख्य वक्ता के रूप में कॉ.रुहेला सिंह मंडावी और कॉमरेड बसन्त रावटे ने अपनी बात रखी मंच संचालन कॉमरेड ईशवर निर्मलकर ने किया।
दल्ली राजहरा के ऐतिहासिक लाल मैदान में 2-3 जून 1977 को पुलिसिया गोलीकांड में अपने प्राण की कुर्बानी देने वाले बालक सुदामा के साथ 11 वीर शहीद मजदूरों की शहादत को याद करते हुए लाल सलामी दिवस के रूप में मनाया गया।
2-3 जून के वीर शहीद मजदूरों का जुझारू संघर्ष और कुर्बानी का अदम्य साहस देश के मजदूर-किसान, छात्र-नवजवान, बेरोजगार, महिलाओं व तमाम शोषित-दमित वर्ग को अपने जनवादी अधिकारो की रक्षा करने और एक नये समतामूलक-शोषण विहीन समाज की रचना के लिए संघर्ष और निर्माण की प्रेरणा देती चली आ रही है।
2-3 जून 1977 को पुलिसवालों की अंधाधुंध गोली चालन में 11 मजदूर शहीद हुए जिसमे 2 जून 1977 को दल्ली राजहरा गोलीकांड में 11 वर्षीय बालक सुदामा को भी निशाना बनाया गया, पुलिस के बन्दूक से निकले हुए गोलियों ने शहीद सुदामा के पेट को चिरते हुए उसे दल्ली राजहरा की धरती में मौत की नींद सुला दिया।
2-3 जून 1977 में पुलिसिया गोलीकांड में शहीद हुए महिला कॉमरेड अनुसुईया दीदी जिसमे लोगो को इकठ्ठा करने और उनके नेतृत्व करने की शक्ति थी, इसी कारण अपने खदान श्रमिक साथियो की नेतृत्व कर्ता चुनी गई, अन्य मजदूर साथियो के साथ अनुसुईया दीदी ने भी लाल हरा झंडे को थाम कर पूरे जोश के साथ संगठन का काम करने लगी 2 जून 1977 की भयंकर रात को अनुसूईया दीदी सभी मजदूरो के साथ दल्ली राजहरा के लाल मैदान में डटी रही और सबका जोश बढ़ाती रही। इसी दौरान पुलिसिया गोलीकांड में अनुसूईया दीदी की छाती में कातिलों की गोली लगी और अपने प्यारे मजदूर भाई बहनों को छोड़ कर अनुसूईया दीदी ने अपने प्राण की कुर्बानी दे दी।
जब-जब शोषक शक्तियों मेहनतकश वर्ग के अधिकारों और संघर्ष पर अपने खूनी पंजो से हमला करने की कोशिश की है, तब-तब 2-3 जून के वीर शहीदों की कुर्बानी ने आंदोलन को तेज करने नये साहस और कुर्बानी की चेतना पैदा की है।
इस लाल सलामी दिवस में जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के याद राम कोर्राम, ह्यूमन तुमरेकी, सुरेंद्र पांडे, पुसउ राम साहू, पवन विश्वकर्मा, राजा मसीह, शंभु यादव, ललित गेडाम, शुशील निषाद, राम प्रशाद सोरी, नवल चन्द्राकर, राजेश दुग्गा, शत्रुघन साहू, गज्जू मंडावी, के साथ सैकड़ो जन मुक्ति मोर्चा के मजदूर साथी उपस्थित थे।

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