बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए महिला को जमकर फटकार लगाई है। महिला अपने ससुराल को शादी के 3 महीने बाद ही छोड़ कर चली गई। और पति को घर जमाई बनाकर मायके में रखना चाहती थी।
दरअसल कोरबा निवासी शैलेंद्र चंद्रा की शादी 2011 में शक्ति की रहने वाली भारतीय से हुई थी। दोनों के बीच कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन 3 महीने बाद ही दोनों आपस में लड़ने झगड़ने लगे। जिसके बाद महिला अपने ससुराल को छोड़कर मायके चली गई। पति अपनी रूठी हुई पत्नी को मनाने पहुंचा।
लेकिन पत्नी ने ससुराल लौटने से साफ इनकार कर दिया। काफी समझाने बुझाने के बाद पत्नी अपने ससुराल वापस लौटी लेकिन पत्नी मायके मैं रहने के जिद पर अड़ी थी। और वह पत्नी को भी अपने साथ वहां रखना चाहती थी। इसी दरमियान 2013 को वह अपने मायके दोबारा लौट गई।
पति अपने पत्नी को समझा-बुझाकर वापस लाने के लिए दोबारा पत्नी के मायके पहुंचा। पति ने अपने मां की खराब तबीयत के बारे में भी बताया। लेकिन पत्नी ने पति को दहेज़ प्रताड़ना का केस करके फंसाने की धमकी दे डाली। पति सारे चीजों से परेशान होकर फैमिली कोर्ट पहुंचा। और तलाक की अर्जी लगाई लेकिन फैमिली कोर्ट ने समझौता कराकर अपना पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद भी पत्नी मायके नही लौटी।
हाइकोर्ट के दहलीज़ में पहुंचा मामला
मामला बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंचा जहां कोर्ट ने कोरबा फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट ने बड़ी गलती की है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पति पर मायके में रहने के लिए दबाव बनाना क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसलिए दोनों की तलाक की अर्जी मंजूर की जाती है।
बिलासपुर हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय परिवार में शादी के बाद माता-पिता से अलग रहने की परंपरा नहीं है। बच्चे को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने वाले माता-पिता कभी नहीं चाहते कि उनका बेटा उनसे अलग रहे। हालात उस समय और अलग रहता है जब परिवार में कमाने वाला सिर्फ एक उनका बेटा हो। ऐसी परिस्थितियों में पति पर अपने परिवार से अलग रहने का दबाव क्रूरता माना जाएगा।

